Lord Ram: कैकई ने श्रीराम को बना दिया मर्यादापुरुषोत्तम राम, तिरस्कार के बजाय होनी चाहिए पूजा

लखनऊ में नारी शक्ति पर वेबिनार में कई विशेषज्ञों ने कैकई को लेकर विचार रखे। आचार्य जितेंद्र शास्त्री ने कहा कि कैकई ने ही श्रीराम को बना दिया “मर्यादा पुरुषोत्तम राम” बना दिया। वर्षों से अपेक्षित अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भी शुरू हो चुका है।

Rafiya NazFri, 15 Oct 2021 03:21 PM (IST)
लखनऊ में नारी शक्ति पर आयोजित हुआ वेबिनार।

लखनऊ जागरण संवाददाता। नारी सशक्तीकरण को लेकर बुधवार को आयोजित वेबिनार में आचार्य जितेंद्र शास्त्री ने शक्ति की प्रतीक और रामायण की सशक्त पात्र कैकई को श्रीराम का सबसे करीबी बताया। उन्होंने कहा कि कैकई ने ही श्रीराम को बना दिया “मर्यादा पुरुषोत्तम राम” बना दिया। वर्षों से अपेक्षित अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण भी शुरू हो चुका है। रघुकुल में तो कई पराक्रमी राजा हुए ,इस कुल में तमाम धर्मात्मा भी हुए,त्यागी हुए,सत्यवादी हुए ,राजा रघु से यह वंश रघुवंश कहलाया। इस वंश में इक्ष्वाकु, ककुत्स्थ, हरिश्चंद्र, मांधाता, सगर, भगीरथ, अंब्रीश, दिलीप, रघु व दशरथ जैसे महान-महान राजा हुए। स्वयं को डोम के हाथ बिकने वाले सत्यवादी हरिश्चंद्र की पूजा नही होती न मंदिर बना हैं आख़िर “राम” में ऐसा क्या गुण था कि उनकी पूजा देश विदेश में होती हैं ,उनको मर्यादापुरुषोत्तम कहा जाता हैं।

पूरे देश में राम राज्य की संकल्पना की जा रही हैं । कैकई जैसी मां नही थी,यह वही मां है जिसने राम जैसे राजा को “मर्यादापुरुषोत्तम राम” बनाने के लिए खुद को क़ुर्बान कर दिया। लोग जिस मां को कपटी व अवसरवादी जैसे तमाम अपशब्दों से गालियां देते हैं वे अज्ञानी और अल्पज्ञानी और स्वार्थी लोग हैं। जब राम जन्म से पूर्व ही राजा दशरथ को श्रवण कुमार के माता -पिता ने यह श्राप दिया की “ हे दशरथ जिस प्रकार मैं अपने पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग रहा हूं उसी तरह तुम भी अपने पुत्र वियोग में प्राण त्यागोगे” इस श्राप का सीधा अर्थ हैं की राजा दशरथ के भी पुत्र की मृत्यु होगी जिसके वियोग में राजा दशरथ की तड़प तड़प के मृत्यु हो जाएगी, किंतु एक मां ने जिसका नाम कैकई हैं उसने श्राप की दिशा मोड़ दिया,पुत्र वियोग में तो राजा की मृत्यु तो होनी निश्चित हैं तो क़्यो न पुत्र को ही बचा लिया जाए इस उच्च सोच रखने वाली मां ने पिता से पुत्र को अलग कर दिया । गोस्वामी जी ने लिखा है कि “भरत मात कह कहसि किन ,कुशल राम महिपाल !लखन भरत रिपुदमन सुनि ,भा कुबरी उर शाल “ माता ने सबसे पहले राम महिपाल का कुशल क्षेम पूछती है फिर सबका कुशल क्षेम पूछती है यहां तक कि अपने गर्भ से जने भरत का हाल भी राम के बाद पूछती हैं ऐसी माता भला कैसे क़ुमाता हो सकती हैं जिसने जगत कल्याण के लिए अपयश लिया,अपने सिंदूर को न्योछावर कर दिया,स्वयं के पुत्र की निगाह से गिरा लिया,प्राणों से प्रिय पुत्र राम से 14 वर्ष की जुदाई झेलने को तैयार हो गई,जिसने राम को राम से मर्यादापुरुषोत्तम राम बना दिया ऐसी मां को तिरस्कार की भावना से नही देखना उचित होगा, उसकी पूजा होनी चाहिए। वेबिनार में कई विशेषज्ञों ने कैकई को लेकर विचार रखे।

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