CM योगी आदित्यनाथ के सुझाए फार्मूले पर सिंचाई विभाग ने बचाए 100 करोड़, बाढ़ की समस्या का स्थाई हल भी निकला

सीएम योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशन में सिंचाई विभाग को आगामी वर्षों में बाढ़ सुरक्षा के कार्य न्यूनतम व्यय में निपटाने की राह मिली हैं। ऐसा नदियों की ड्रेजिंग से संभव होगा। साथ ही ड्रेजिंग से निकले बालू की नीलामी से खर्च भी निकल जाएगा।

Umesh TiwariWed, 16 Jun 2021 07:00 AM (IST)
सीएम योगी आदित्यनाथ के सुझाए फार्मूले पर सिंचाई विभाग ने 100 करोड़ रुपये बचाए है।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। हल्दी लगी न फिटकरी और रंग चोखा, यह पुरानी कहावत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बाढ़ सुरक्षा के लिए सुझाए फार्मूले पर सटीक दिख रही है। ड्रेजिंग से नदियों को गहरा करने से बाढ़ के पानी का फैलाव थमेगा और जानमाल की तबाही भी नहीं होगी। यानी बिना सरकारी खजाने पर बोझ डाले बाढ़ सुरक्षा मिलेगी। इसी फार्मूले पर अमल करते हुए सिंचाई विभाग ने एग्लिन चरखारी बांध पर 108 करोड़ रुपये के खर्च से होने वाले काम को मात्र आठ करोड़ रुपये में निपटा दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशन में सिंचाई विभाग को आगामी वर्षों में बाढ़ सुरक्षा के कार्य न्यूनतम व्यय में निपटाने की राह मिली हैं। ऐसा नदियों की ड्रेजिंग से संभव होगा। ड्रेजिंग से नदियां गहरी हो जाएंगी, जिससे बारिश का पानी नदी के पेट में ही सिमटा रहेगा। लिहाजा बाढ़ के रूप में एक बड़े दायरे में फैलकर जान माल की तबाही की वजह नहीं बनेगा। साथ ही ड्रेजिंग से निकले बालू की नीलामी से खर्च भी निकल जाएगा।

कई संवेदनशील स्थलों पर सफल रहा प्रयोग : बाढ़ को लेकर बेहद संवेदनशील पूर्वांचल और अन्य जगहों पर ड्रेजिंग फार्मूले के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं। सरयू, राप्ती, गंगा और गुर्रा नदियों में इसी प्रयोग से लखीमपुर, बस्ती, गोरखपुर, बलरामपुर, गोंडा, अयोध्या, सीतापुर, बलिया, बाराबंकी, मऊ और उन्नाव में व्यापक सफलता मिली है।

ऐसे निकली राह : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांसद के तौर पर वर्ष 1998 में गोरखपुर की उस बाढ़ को भी देखा है, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई ने जलप्रलय की संज्ञा दी थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका फोकस बाढ़ सुरक्षा पर रहा। इसी क्रम में एल्गिन चरखारी बांध का हेलीकाप्टर से भ्रमण करते समय उन्होंने नदी की ड्रेजिंग के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग के पास ड्रेजिंग मशीन भी है। ड्रेजिंग काम शुरू हुआ तो 108 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की जगह मात्र आठ करोड़ रुपए ही खर्च हुए। इसके बाद यह प्रयोग अन्य कई नदियों पर किया जा रहा है।

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