प्रयागराज की सिल्का सेंड से बनेंगी स्वदेशी सोलर प्लेट, टूटेगा चीन का वर्चस्व: केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान महोत्सव के समापन पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की घोषणा।

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को एलयू में घोषणा कि प्रयागराज में सिल्का सेंड की उपलब्धता प्रचुर है। जिसका उपयोग स्वदेशी सोलर प्लेट बनाने के लिए किया जाएगा। जिससे इस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व टूटेगा।

Publish Date:Tue, 24 Nov 2020 06:35 PM (IST) Author: Rafiya Naz

लखनऊ, जेएनएन। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को घोषणा की है कि प्रयागराज में सिल्का सेंड की उपलब्धता प्रचुर है। जिसका उपयोग स्वदेशी सोलर प्लेट बनाने के लिए किया जाएगा। जिससे इस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व टूटेगा। उन्होंने ये बात लविवि के विज्ञान महोत्सव के अंतिम दिन बतौर मुख्य अतिथि कही।विज्ञान उत्सव के पांचवें और अंतिम दिन मंगलवार को स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसके अलावा विज्ञान के संकाय के विभिन्न विभागों के स्टालों ने वैज्ञानिक दुनिया में नए विकास का प्रदर्शन किया।

मुख्य अतिथि केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बीच संबंध रहे हैं। विश्वविद्यालयों ने भारतीय राजनीति में कई विभूति दिये। उन्होंने कहा कि छात्रों और संकाय सदस्यों को न केवल विश्वविद्यालय में योगदान करना चाहिए, बल्कि उन्हें समाज के समग्र विकास में योगदान देना चाहिए। भारत के युवाओं की ताकत पूरे देश को मजबूत कर रही है और कार्यक्रम में मौजूद युवाओं से विश्वविद्यालय के विकास में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि विज्ञान और उससे जुड़े विद्यार्थी ही आत्मनिर्भर भारत की नींव रखेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिकाें ने प्रयागराज में सिल्का सेंड से सोलर पैनल की प्लेट बनाने की खोज की है। जिससे चीन से इन प्लेट का आयात बंद होगा। ये सस्ती होंगी। ऐसे ही खनिजों से पूरा देश और प्रदेश भरा हुआ है। जरूरत है बस इनको खोजने की।

साइंस फेस्ट की आयोजन समिति की अध्यक्ष प्रोफेसर विभूति राय ने अपने स्वागत भाषण में अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय के 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार इस विज्ञान महोत्सव का आयोजन किया गया है । उन्होंने बताया कि जहां विभिन्न विभागों और कॉलेजों के कुल 40 स्टॉल और 28 वैज्ञानिक व्याख्यान आयोजित किए गए थे। उन्होंने नई शिक्षा नीति की सिफारिशों को लागू करने के लिए विश्वविद्यालय की पहल के बारे में भी उल्लेख किया, जो देश को आत्मनिर्भर बनाएगा। कुलपति, प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने दोनों अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि डॉ महेंद्र सिंह ने 1989-2000 से छात्र और संकाय सदस्य के रूप में इस विश्वविद्यालय का हिस्सा होने पर गर्व महसूस करते हैं। इस मौके पर डीन फैक्ल्टी साइंस डॉ तृप्ता त्रिवेदी, प्रो सुधीर मेहरोत्रा, डॉ गीतांंजलि मिश्रा मौजूद रहीं।

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