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Fight Against COVID-19: कोविड वैक्सीन से बढ़ती है इम्यूनिटी, होम आइसोलेशन में खुद को कैसे करें मॉनिटर; जानिए एक्सपर्ट राय

केजीएमयू के पैरामेडिकल साइंसेस के डीन डॉ विनोद जैन दो बार कोरोना को हराया।

केजीएमयू में प्रोफसर ऑफ सर्जरी एवं फैकल्टी आॅफ पैरामेडिकल साइंसेस के डीन और इंफेक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ट्रेनिंग के इंचार्ज डाॅ विनोद जैन दो बार कोविड पाॅजिटिव हो चुके हैं। दोनों बार उन्होंने और उनके पूरे परिवार ने कोरोना को मात दी।

Rafiya NazTue, 18 May 2021 01:24 PM (IST)

लखनऊ [दुर्गा शर्मा]। केजीएमयू में प्रोफसर ऑफ सर्जरी एवं फैकल्टी ऑफ पैरामेडिकल साइंसेस के डीन और इंफेक्शन प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ट्रेनिंग के इंचार्ज डाॅ विनोद जैन दो बार कोविड पाॅजिटिव हो चुके हैं। कोरोना की पहली लहर में अगस्त में डा विनोद जैन संक्रमित हुए। वहीं, दूसरी लहर ने तो पूरे परिवार को ही अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, अब परिवार के सभी सदस्यों के साथ ही डाॅ विनोद जैन भी कोरोना को हरा चुके हैं। सोमवार से वह फिर से काम पर भी लौट आए हैं। वह कहते हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ानी ही है, पर कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन सबसे सशक्त हथियार है। मैं वैक्सीन की दोनों डोज ले चुका था, इसलिए जब दोबारा संक्रमित हुआ तो बिल्कुल निश्चिंत था। मुझे मालूम था कि टीकाकरण के कारण मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा। वैक्सीन को लेकर किसी तरह की भ्रांति में न पड़ें। वैक्सीन लगवाएंगे तो संक्रमण का असर कम होगा।

होम आइसोलेशन में भी बुखार के दो-तीन दिन छोड़ दें तो डाॅ विनोद जैन ऑन ड्यूटी ही रहे। वह घर से ही आॅनलाइन सेशन लेते रहे। डाॅ विनोद जैन बताते हैं, मेरी उम्र साठ साल से ज्यादा है, इसलिए कोरोना वार्ड में तो ड्यूटी नहीं लगी, पर मैं इस जंग में अपनी तरफ से योगदान देता रहा। कोरोना की पहली लहर जब आई तब स्वास्थ्य कर्मियों के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया। तभी मैंने टीचिंग ट्रेंनिंग वीडियो तैयार किया था, जिसे चिकित्सा सेतु एप और केजीएमयू की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। दूसरी लहर के ठीक पहले इन सभी वीडियो का अंग्रेजी वर्जन भी तैयार कर लिया गया। वर्तमान में आठ राज्यों के स्वास्थ्यकर्मी इसका लाभ उठा रहे। सब की सुरक्षा हमारा दायित्व है, इसमें यह वीडियो बहुत कारगर है।

होम आइसोलेशन में यूं रखें अपना ध्यान

डाॅ विनोद जैन के अनुसार होम आइसोलेशन में बिना एक्सरे और सीटी स्कैन के भी फेफड़ों के स्वास्थ्य को माॅनीटर कर सकते हैं। कुछ आसान से तरीके हैं- ब्रेथ होल्डिंग टेस्ट गहरी सांस लेकर रोकें। चेक करें कि कितनी देर तक सांस रोक सकते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर पहले दिन 30 सेकेंड आया, उसके बाद ये लगातार कम होता गया तो डाॅक्टर से बात करें। यह एक्सरसाइज दिन में एक बार ही करें।

छह या तीन मिनट वाॅक टेस्ट: ऑक्सीमीटर में पहले रीडिंग ले लें उसके बाद जो 60 साल के अंदर हैं, वे सौ कदम प्रति मिनट के हिसाब से छह मिनट तक वाॅक करें। वाॅक करने के बाद अगर ऑक्सीमीटर में आई पहले की रीडिंग में 3 प्रतिशत या ज्यादा कमी आती है तो सचेत हो जाएं। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग यही टेस्ट तीन मिनट वाॅक के बाद कर सकते हैं।

डीप ब्रीथिंग एक्सरसाइज के लिए स्पाइरोमीटर ले सकते हैं। सुबह शाम इसकी मदद से सांसों का व्यायाम करें।

हाइड्रेशन और डाइट

प्रोटीन डाइट लें। हाइड्रेशन का खूब ध्यान रखें। ओआरएस, जूस, सूप, मौसमी फल आदि जरूर लें। हाइड्रेशन और प्रोटीन डाइट रखेंगे तो जल्दी ठीक होंगे। शारीरिक के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें। मेडिटेशन करें।

पल्स ऑक्सीमीटर का प्रयोग करते समय सावधानी: 

नाखून बड़े होते हैं तो ऑक्सीजन सेंसर तक हाथ नहीं पहुंचता और रीडिंग गलत आती है। यही दिक्कत अगर हाथ में ग्रीस लगी हो या अंगूठी पहनी हो, हाथ मुड़ा हो या अंगुली बहुत पतली हो तो भी आती है। सेंसर को हर तीसरे दिन साफ करें, जैसे चश्मा साफ करते हैं। तुरंत आई हुई रीडिंग नहीं, 30 सेकेंड के बाद की रीडिंग को सही मानें। पेट के बल लेटना है लाभकारी अगर ऑक्सीजन लेवल 90 तक रहता है तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं। पेट के बल लेटकर तीन से चार प्रतिशत तक ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाया जा सकता है। अगर आॅक्सीजन लेवल 90 से कम होता है तो होम आइसोलेशन ठीक नहीं।

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