गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी पुलिस को दिया जस्ट एक्शन का गुरु मंत्र, आधुनिकीकरण पर दिया जोर

लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंसेज के शिलान्यास के मौके पर गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश पुलिस को जस्ट एक्शन यानी न्यायपूर्ण कार्रवाई का गुरुमंत्र दिया। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले पुलिसिंग की जो कल्पना थी वह अब नहीं रह गई है।

Umesh TiwariSun, 01 Aug 2021 10:22 PM (IST)
अमित शाह ने उत्तर प्रदेश पुलिस को जस्ट एक्शन यानी न्यायपूर्ण कार्रवाई का गुरुमंत्र दिया।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंसेज के शिलान्यास के मौके पर गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश पुलिस को जस्ट एक्शन यानी न्यायपूर्ण कार्रवाई का गुरुमंत्र दिया। उन्होंने कहा कि 20 साल पहले पुलिसिंग की जो कल्पना थी, वह अब नहीं रह गई है। नारकोटिक्स, आतंकवाद, साइबर अपराध, आर्थिक अपराध, हथियारों की तस्करी, गौ तस्करी समेत अनेक प्रकार के अपराधों से लड़ने के लिए पुलिस को आधुनिकीकरण की जरूरत है। इंस्टीट्यूट उसकी आधारशिला बनेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पुलिस के दो तरह के एक्शन देखने को मिलते हैं। नो एक्शन व एक्स्ट्रीम एक्शन। अकर्मण्यता ठीक नहीं है। एक्स्ट्रीम एक्शन की प्रतिक्रिया होती है। पुलिस को जस्ट एक्शन यानी न्यायपूर्ण/स्वाभाविक कार्रवाई की ओर बढ़ना होगा। शाह ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिये दोषियों को सजा दिलाने से बात बनेगी। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की कानून-व्यवस्था को बल देने के लिए कई पहल की हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, गांधीनगर तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। अब राज्यों में इन संस्थानों से संबद्ध संस्थानों की शुरूआत हो रही है।

यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंसेज में भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, बिहेवियरल साइंस, अपराध शास्त्र, विधि, पुलिस विज्ञान व पुलिस प्रशासन विषयों की पढ़ाई होगी। इसके निर्माण का कार्य दो सप्ताह में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 207 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संस्थान में बीएससी, एमएससी फारेंसिक साइंस, एमफिल, पीएचडी, पोस्ट डाक्टोरल रिसर्च, पीजी डिप्लोमा इन फोरेंसिक साइंस, एडवांस स्पेशलाइज्ड एंड टेलरमेड पीजी डिप्लोमा व अन्य पीजी सर्टिफिकेट के कोर्स होंगे। संस्थान में प्रतिवर्ष 500 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

इंस्टीट्यूट में कुल आठ अनुभाग व 14 प्रयोगशालाएं होंगी। इंस्टीट्यूट 50 एकड़ भूमि में बनेगा। इंस्टीट्यूट में निदेशक, अपर निदेशक, उपनिदेशक, प्रशासनिक अधिकारी, वित्त नियंत्रक व विभिन्न संकायों में प्रोफेसर समेत कुल 351 पद प्रस्तावित हैं। इंस्टीट्यूट के बगल में करीब 50 एकड़ भूमि पर डीएनए सेंटर फार एक्सीलेंस का निर्माण होगा।

वैज्ञानिक साक्ष्यों में बढ़ेगा पुलिस का दखल : इंस्टीट्यूट पूरे उत्तर भारत के लिए एक रिसोर्स सेंटर होगा। इंस्टीट्यूट में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों, पुलिस अधिकारियों व न्यायिक अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण भी होगा। सबसे अहम बात यह है कि इंस्टीट्यूट के वजूद में आने के बाद हर जिले में फारेंसिक मोबाइल भी उपलब्ध कराई जाएंगी। साइबर अपराध से लेकर जघन्य घटनाओं की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए पुलिस को आरोपितों को कम समय में कठोर सजा दिलाने में कामयाबी मिलेगी। यहां छात्र-छात्राएं अनुसंधान में हिस्सा लेकर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश की कानून-व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी बनेंगे।

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