हाथरस का बूलगढ़ी कांड : इंसाफ के इंतजार में बीते एक साल, 29 तारीखें और 16 गवाही; जानें- पूरा केस

Hathras Case News एक साल पहले आज के दिन शर्मसार करने वाली घटना ने हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव को सुर्खियों में ला दिया था। बूलगढ़ी में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती पर हमला हुआ था। कई दिन तक बूलगढ़ी सियासी जंग का मैदान बना रहा।

Umesh TiwariTue, 14 Sep 2021 06:00 AM (IST)
यूपी में एक साल पहले आज के ही दिन हुआ था हाथरस का बूलगढ़ी कांड।

हाथरस [हिमांशु गुप्ता]। एक साल पहले आज ही के दिन शर्मसार करने वाली घटना ने उत्तर प्रदेश हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव को सुर्खियों में ला दिया था। कई दिन तक बूलगढ़ी सियासी जंग का मैदान बना रहा। एसआइटी फिर सीबीआइ ने मामले की जांच कर सुबूत जुटाए। कई अफसरों पर कार्रवाई हुई। 67 दिन की जांच के बाद सीबीआइ ने चारों आरोपितों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की धाराओं में चार्जशीट विशेष न्यायालय एससी-एसटी अधिनियम में दाखिल की। अब तक 29 तारीख पड़ चुकी हैं, 104 में से 16 लोगों की गवाही हो चुकी है। अगली सुनवाई 23 सितंबर को होनी है। लोगों को अदालत के फैसला का इंतजार है। गिरफ्तारी के बाद से ही चारों आरोपित जेल में हैं।

बूलगढ़ी में 14 सितंबर, 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती पर हमला हुआ था। युवती के भाई ने गांव के ही संदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में युवती के बयानों के आधार पर गांव के रवि, रामू और लवकुश के नाम और धाराएं बढ़ाई गईं। युवती का इलाज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जवाहर लाल नेहरू (जेएन) मेडिकल कालेज में चला। 28 सितंबर को युवती को अलीगढ़ से दिल्ली रेफर किया गया। 29 को उसकी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई।

युवती की मौत के बाद यह मामला गरमा गया। देशभर के नेता, संगठनों से जुड़े लोग मृतका के स्वजन से मिले। सीबीआइ ने घटनास्थल से लेकर, थाना, अस्पताल में इलाज समेत हर पहलू को खंगाला। सीन रीक्रिएट किया गया। मृतका, आरोपितों के स्वजन, ग्रामीण, प्रधान, पुलिस, डाक्टर सबसे पूछताछ कर 67 दिन बाद 18 दिसंबर को विशेष न्यायालय एससी-एसटी अधिनियम में सामूहिक दुष्कर्म और हत्या समेत अन्य धाराओं में चार्जशीट दाखिल की। सीबीआइ ने 104 लोगों को गवाह बनाया। चार जनवरी को केस की पहली तारीख पड़ी। मामले की न्यायालय में सुनवाई जारी है।

हमले वाले खेत के हिस्से में अभी फसल नहीं : लगभग 1800 की आबादी वाला गांव बूलगढ़ी आगरा-अलीगढ़ रोड से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। इसी रास्ते पर गांव से आधा किलोमीटर पहले वह खेत पड़ता है, जहां घटना हुई थी। इस खेत का हमले वाला स्थान अभी खाली है। बिटिया के स्वजन की सुरक्षा में उनके घर पर एक नवंबर, 2020 से दिनरात 80 सीआरपीएफ जवान पहरा देते हैं। आठ सीसीटीवी कैमरों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है।

स्वजन को न्याय का इंतजार : एक साल में बूलगढ़ी की फिजा भी बदली है। गांव में अब न तनाव है और न सन्नाटा। ठाकुर और अनुसूचित जाति के लोगों के बीच रिश्ते सुधरने लगे हैं। जो कुछ हुआ उसका मलाल हर किसी को है। अनुसूचित जाति के लोग दूसरे समाज के लोगों के खेतों में काम करते नजर आए। मृतका के पिता का पांच बीघा खेत गांव के ही एक व्यक्ति ने बंटाई पर ले रखा है। बिटिया की बात शुरू होते ही पिता की आंखें भर आईं और वह बोले उसकी आत्मा अभी भी इंसाफ के लिए भटक रही है। हमें पूरी उम्मीद है कि इंसाफ जरूर मिलेगा। बड़े भाई का कहना था कि जब भी उस खेत के पास से होकर गुजरते हैं तो डर लगने लगता है। छोटे भाई का कहना है कि सरकार और प्रशासन ने बहन की मौत के बाद ये भरोसा दिलाया था कि घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और सरकारी आवास दिलाएंगे मगर आज तक न तो नौकरी मिली और न आवास।

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