यूपी के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर, तीन नई प्रजातियां विकसित- ऐसे बढ़ेगा उत्पादन

यदि आप गन्ना किसान हैं। गन्ने की फसल के उत्पादन को लेकर परेशान हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने शुक्रवार को गन्ने की तीन नई प्रजातियों को जारी किया है। शीघ्र ही यह किसानों के लिए उपलब्ध होगी।

Vikas MishraSat, 23 Oct 2021 08:36 AM (IST)
बुआई के बाद आए सार्थक परिणाम से संस्थान अब इन प्रजातियों को किसानों के लिए तैयार कर रहा है।

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। यदि आप गन्ना किसान हैं। गन्ने की फसल के उत्पादन को लेकर परेशान हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान ने शुक्रवार को गन्ने की तीन नई प्रजातियों को जारी किया है। शीघ्र ही यह किसानों के लिए उपलब्ध होगी। नई प्रजातियाें के बोने पर उर्वरक की खपत कम होने के साथ ही सिंचाई भी कम करनी पड़ेगी। उत्पादन में प्रति एकड़ 10 से 15 फीसद की बढ़ोतरी होगी। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की ओर से पिछले वर्ष सात नई प्रजातियों को परीक्षण कर उनकी बुआई की गई थी।

बुआई के बाद आए सार्थक परिणाम से संस्थान अब इन प्रजातियों को किसानों के लिए तैयार कर रहा है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डा. अजय कुमार साह ने बताया कि इन नई प्रजातियों से चीनी की मात्रा में बढ़ोतरी के साथी ही गन्ने के उत्पादन में भी 10 से 20 फीसद तक इजाफा होगा। निदेशक डा.एडी पाठक के निर्देशन में गन्ने के विकास को लेकर संस्थान की ओर से समय-समय पर शोध किए जाते हैं। कई वर्षों की मेहनत के बाद नई प्रजातियां विकसित होती हैं। परिसर में दो दिवसीय बैठक के दौरान संस्थान की तीन और कोयमबदूर की दो प्रजातियों को जारी किया गया। बैठक के दौरान विशेषज्ञों ने उर्वरक की मात्रा कम करने और हल्की सिंचाई से गन्ने की उत्कृष्ट और अधिक चीनी उत्पादन वाली गन्ने की किस्म विकसित करने की वकालत की थी। 

ये हैं गन्ने की नई प्रजातियां 

कोलख             15201 कोलख             15204 कोलख             15466 

पिछले वर्ष जारी प्रजातियां 

सीओएलके        14204 सीओ                15023 सीओपीबी          14185 सीओएसई          11453 एमएस               130081 वीएसआइ           12121 सीओ                 13013

लखनऊ भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान निदेशक डा. एडी पाठक ने बताया कि वर्ष 2022 तक 10 फीसद और 2030 तक 20 फीसद एथेनाल पेट्रोल में मिलाने की मांग होगी जिसके लिए हमारे वैज्ञानिक तैयार हैं। नई किस्मों से चीनी की मात्रा बढ़ेगी और एथेनाल की बढ़ती मांग को भी हम पूरा कर सकेंगे। वैज्ञानिकों की सोच का ही नतीजा है कि हम नई प्रजातियों को विकसित कर सके हैं। बैठक में कोयम्बदूर के गन्ना प्रजनन संस्थान की नई प्रजाति अवनी-14012 और कोपी- 11438 को भी जारी किया गया।

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