36 वर्षों से निर्मल नहीं हो पाई गंगा, गोमती सरयू राप्ती और घाघरा का भी बुरा हाल; एनजीटी चिंतित

छत्तीस वर्षों से निगरानी के बाद भी निर्मल नहीं हो पा रही गंगा नदी को लेकर एनजीटी की टिप्पणी ने सरकारी महकमों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस टिप्पणी से मैली हो रही और कागजों में ही साफ हो रही अन्य नदियों की उम्मीदें जाग गई हैॆ।

Dharmendra MishraWed, 01 Dec 2021 08:37 AM (IST)
गंगा, गोमती, सरयू और घाघरा के मैली होने पर एनजीटी ने लगाई फटकार

लखनऊ, अजय श्रीवास्तव।  छत्तीस वर्षों से निगरानी के बाद भी निर्मल नहीं हो पा रही गंगा नदी को लेकर राष्ट्रीय हरित अभिकरण की 29 नवंबर को की गई टिप्पणी ने सरकारी महकमों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस टिप्पणी से मैली हो रही और कागजों में ही साफ हो रही अन्य नदियों की उम्मीदों को जगा दिया है। गंगा की सफाई के लिए आवंटित धन पर जवाबदेही तक मांगी गई है, लेकिन हकीकत में अन्य नदियों की सफाई में सिर्फ सरकारी धन को बहाया ही गया था।

गंगा की तरह ऐसा ही हाल लखनऊ की गोमती से लेकर अयोध्या से गुजरी सरयू के अलावा घाघरा, राप्ती और गोरखपुर के रामगढ़ ताल का भी है, जहां आज भी सीवर घुल रहा है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण की फटकार के बाद जब नदियों की हकीकत से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई तो अफसर कटघरे में खड़े नजर आए।

गोमती मे गिरता है 339 एमएलडी सीवरः

रिपोर्ट कहती है कि लखनऊ शहर में करीब 784 एमएलडी सीवर जनित होता है। इसमे से 445 एमएलडी के पांच एसटीपी ही संचालित हो रहे हैं। 120 एमएलडी क्षमता का एसटीपी दिसंबर 2022 तक तैयार हो पाएगा, जबकि तीस एमएलडी क्षमता का एसटीपी फरवरी 2023 तक तैयार होगा, जबकि 22 एमएलडी और 80 एमएलडी 85 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रस्तावित है, जिसे वित्तीय मंजूरी का इंतजार है।

अयोध्या का सीवर घुल रहा सरयू मेंः

सरयू में ही गिर रहा 17 नालों का सीवर सरयू नदी लगातार मैली हो रही है। सरयू नदी का यह हाल अयोध्या में ही है। नगर विकास विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सरयू नदी में 22 नाले जुड़े हैं, लेकिन इसमे पांच नाले ही टैप हैं और उसकी गंदगी एसटीपी में जा रही है। इसमे सोलह नालों के सीवर का शोधन करने के लिए छह एमएलडी और 33 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी को मंजूरी भी मिल चुकी है लेकिन सरयू को सीवर से कब मुक्ति मिलेगी? यह अभी सवाल ही है। इसी तरह अयोध्या कैंट क्षेत्र में एक नाला और निर्मली कुंड की गंदगी भी नदी में जा रही है

आमी नदी में गिर रहे तीन नालेः

आमी नदी में तीन नालों की गंदगी घुल रही है। इसमे सीवर भी है। नगर पालिका खलीलाबाद और नगर पंचायत मगहर ने डीपीआर (विस्तृत कार्ययोजना) तैयार की थी। इसमे मगहर नगर पंचायत में 32 केएलडी (किलो लीटर डेली-एक केएलडी मतलब एक हजार लीटर) एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) 587.40 लाख की परियोजना मंजूरी के अभाव में लटकी है। इसी तरह खलीलाबाद में भी 32 केएलडी के एसटीपी 587.40 लाख से बनना है लेकिन फाइल चल रही है। जलनिगम को अभी तक यह पता नहीं है कि परियोजना को वित्तीय मंजूरी मिलने की मौजूदा स्थिति क्या है।

गोरखपुर की रामगढ़ ताल में गिर रहे 18 नालेः

रामगढ़ ताल से कुल 24 नाले जुड़े हैं, जिसमे से महज छह नाले ही एसटीपी में जा रहे हैं, जबकि 18 नाले ताल में गिरकर उसे प्रदूषित कर रहे हैं। सब केंद्र सरकार की अमृत योजना से सीवर नेटवर्क तैयार करने के साथ ही पांच एमएलडी का एसटीपी बनाया जाना है, जिसमे समय सीमा अप्रैल 2023 रखी गई है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू जल-मल के शुद्धिकरण के लिए बायोरेमिडेन और फाइटोरेमिशन तकनीक का उपयोग हो रहा है। वर्ष 2014 से अपनाई जा रही इस तकनीकि की रिपोर्ट भी शासन ने मांगी है कि इस अवधि में जल की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ है। नगर पंचायत बड़हलगंज गोरखपुर, दोहरी घाट, मऊ, गौराबरहज देवरिया के नाले सीधे ही नदी में गिरकर जल को प्रदूषित कर रहे हैं।

पंद्रह नाले कर रहे राप्ती नदी को प्रदूषितः

राप्ती नदी और उसकी सहायक नदियों में कुल 15 नाले गिर रहे हैं। अब अफसरों को नालों को इन नदियों से गिरने से रोकने की याद आई है और अब तैयार डीपीआर को अलमारी से निकाला जा रहा है, जिससे आगे की कार्यवाही हो सके। हालांकि दावा किया गया है कि नदी में गिर रहे इन नालों पर बायोरेमेडिएशन का काम हो रहा है, जिससे नदी में शोधन के बाद भी पानी जाए लेकिन दूसरी तक यह काम कर रही निजी कंपनी लापरवाही करने की को नोटिस जारी की गई है, जिससे साफ है कि सब कागज पर ही चल रहा था।

घाघरा में गिर रहे 14 नाले

घाघरा नदी को भी गंदगी से निजात मिलने में लंबा समय लग सकता है। इन नदी में चौदह नाले गिर रहे हैं। अब इन नालों के पानी को शोधन करने के लिए तीन एसटीपी बनाए जाने की योजना है।

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