Good News: केजीएमयू में जरूरतमंदों को मिल सकती है मुफ्त MRI की सुविधा, कुलपति ने शासन से मांगी नई मशीन

केजीएमयू के कुलपति ले. जनरल बिपिन पुरी ने गरीब मरीजों को मुफ्त एमआरआइ की सुविधा देने के लिए शासन व राज्यपाल से नई एमआरआइ मशीन मांग की है। इसके बाद मरीजों की मुश्किलें काफी आसान हो जाएंगी। किसी को भी पैसों के अभाव में जांच से मेहरूम नहीं होना पड़ेगा।

Rafiya NazMon, 13 Sep 2021 07:35 AM (IST)
केजीएमयू कुलपित ने राज्यपाल व शासन से मांगी नई मशीन।

लखनऊ, [धर्मेन्द्र मिश्रा]। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) अपने यहां आने वाले सभी गरीब मरीजों व आर्थिक रूप से कमजोर रोगियों को मुफ्त एमआरआइ सेवा देना चाहता है। ताकि कमजोर आर्थिक वर्ग वाले मरीजों पर पड़ने वाले चिकित्सा के बोझ को और भी हल्का किया जा सके। केजीएमयू के कुलपति ले. जनरल बिपिन पुरी ने इसके लिए शासन व राज्यपाल से नई एमआरआइ मशीन मांगी है। इसके बाद मरीजों की मुश्किलें काफी आसान हो जाएंगी। अभी यहां विभिन्न रोगों से संबंधित डाक्टरों के परामर्श पर अलग-अलग तरह की एमआरआइ कराने का शुल्क 2500 से 4500 रुपये तक है। इस वजह से गरीब मरीजों के सामने कई बार आर्थिक अक्षमता से मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। जब तक संस्थान व अन्य माध्यमों से उनको राहत दिलाने का प्रयास होता है तब तक एमआरआइ होने में विलंब होने से इलाज भी बाधित रहता है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। केजीएमयू ऐसे आर्थिक रूप से अक्षम सभी जरूरतमंदों को मुफ्त एमआरआइ सेवा उपलब्ध कराएगा। बहुत उम्मीदों से केजीएमयू आता है मरीज: कुलपति डा. बिपिन पुरी ने कहा कि जब भी कोई मरीज केजीएमयू आता है तो वह बहुत सारी उम्मीदें लेकर आता है। मरीज को यह पता होता है कि यहां मेरा अच्छा व सस्ता इलाज होगा। ऐसे में हम ऐसे सभी जरूरतमंदों को एमआरआइ के खर्च के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं। ताकि यहां गरीब से गरीब मरीज का अच्छा व मुफ्त इलाज हो सके। ऐसा होने पर मरीज स्वस्थ व खुशहाल होकर यहां से जाएगा। यही हमारी संतुष्टि होगी।

सरकार जल्द दे सकती है मशीन: जानकारी के अनुसार केजीएमयू के इस प्रस्ताव से सरकार भी सहमत है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी इस प्लान की सराहना कर चुकी हैं। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार जल्द जरूरतमंदों व आर्थिक रूप से कमजोरों के लिए नई एमआरआइ मशीन केजीएमयू को मुहैया कराएगी। कैंसर, ट्रामा के मरीजों व हड्डी रोगों में सर्वाधिक एमआरआइ जांच की जरूरत होती है। निजी अस्पतालों में यह जांच 6500 से 10 हजार तक है।

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