यूपी के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व बसपा के दिग्गज नेता सुखदेव राजभर का निधन, सियासी गलियारे में शोक की लहर

बहुजन समाज पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष रहे सुखदेव राजभर का सोमवार शाम को निधन हो गया। पिछले कई दिनों से किडनी की बीमारी से परेशान चल रहे थे। लखनऊ स्थित चंदन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।

Umesh TiwariMon, 18 Oct 2021 10:00 PM (IST)
यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष व बहुजन समाज पार्टी के विधायक सुखदेव राजभर का निधन हो गया।

लखनऊ, जेएनएन। बहुजन समाज पार्टी के दिग्गज नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष रहे सुखदेव राजभर का सोमवार शाम को निधन हो गया। पिछले कई दिनों से किडनी की बीमारी से परेशान चल रहे थे। लखनऊ स्थित चंदन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। वह तीन दिन पहले किडनी में दिक्कत के चलते यहां भर्ती कराए गए थे। तब से उन्हें डायलिसिस पर रखा गया था। सोमवार रात करीब 8.45 बजे दोनों किडनी फेल हो जाने से उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय तक राजनीतिक पारी खेलने वाले राजभर के निधन से सियासी गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई। सभी दलों से मधुर संबंध रखने वाले सुखदेव के निधन की सूचना मिलते ही राजधानी स्थित अस्पताल में विभिन्न पार्टियों के नेताओं का जमावड़ा लग गया। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

आजमगढ़ की दीदारगंज विधानसभा सीट से विधायक सुखदेव राजभर का जन्म पांच सितंबर 1951 को आजमगढ़ के लालगंज तहसील स्थित बरदह के बड़गहन गांव में हुआ था। सुखदेव राजभर वर्ष 2007 से 2012 तक विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें निर्विरोध निर्वाचित किया गया था। वह कई बार राज्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री भी रहे। वर्ष 1989 से वह अखिल भारतीय राजभर महासंघ के अध्यक्ष भी रहे। परिवार में एक पुत्र व पांच बेटियां हैं। पंद्रहवीं विधानसभा में लालगंज से बसपा विधायक रहे। वह सहकारिता, शिक्षा व ग्राम विकास और मायावती के कार्यकाल में संसदीय कार्य और वस्त्र उद्योग मंत्री रहे। चंदन अस्पताल के एमडी डा. फारूक अंसारी ने बताया कि किडनी फेल हो जाने से उनका निधन हो गया।

आजमगढ़ की दीदारगंज विधानसभा सीट से विधायक 70 वर्षीय सुखदेव राजभर के निधन पर शोक जताते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राजभर एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि थे। संसदीय नियमों और परंपराओं की उन्हें गहरी जानकारी थी। वह निर्धन और कमजोर वर्गाें के उत्थान के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति में हुई अपूरणीय क्षति की भरपाई हो पाना कठिन है। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना राजभर के निधन की सूचना पाते ही अस्पताल पहुंचे और वहां शोक संतप्त स्वजन से भेंट की। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अस्पताल पहुंचने वालों में श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री अनिल राजभर, बसपा विधानमंडल दल के नेता गुड्डू जमाली, पूर्व मंत्री रामअचल राजभर आदि थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के पुत्र कमलाकांत राजभर ने बताया कि पार्थिव शरीर मंगलवार सुबह गोमतीनगर स्थित आवास, फिर 11 बजे आजमगढ़ में पैतृक गांव बडगहन ले जाया जाएगा। अंत्येष्टि 20 अक्टूबर को वाराणसी में होगी।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कू एप पर पोस्ट कर कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं माननीय विधायक सुखदेव राजभर जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राजनेता सुखदेव राजभर जी का निधन अत्यंत दुःखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों सहित समर्थकों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता सुखदेव राजभर के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन अपूरणीय क्षति है। शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना, दिवंगत आत्मा को शांति दे भगवान। 'सामाजिक न्याय' को समर्पित आप का राजनीतिक जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा। वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि सुखदेव राजभर के निधन का समाचार दुखद है। आप वंचित समाज के लिए समर्पित रहे, आपका जाना समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। परिवारजन के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदेन करें।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने ट्वीट किया- उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव राजभर के स्वर्गवास का समाचार अत्यंत दुखद है। उनका निधन समाज व राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे एवं स्वजन को यह दुख सहने का संबल प्रदान करे।

मुलायम, कल्याण व मायावती मंत्रिमंडल में रहे कद्दावर मंत्री : एलएलबी की पढ़ाई करने वाले सुखदेव राजभर ने वकालत को अपना व्यवसाय बनाया, लेकिन राजनीति के आसमान पर वे सितारे बनकर उभरे। दूसरी बार विधायक बनने के साथ ही उन्हें राज्यमंत्री बनने का अवसर मिला तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। मुलायम ही नहीं, कल्याण सिंह व मायावती की सरकारों में वे मंत्री के रूप में अहम ओहदों पर रहे। बसपा की पूर्णकालिक सरकार में विधानसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामयी पद तक पहुंचे। आजमगढ़ जिले की दीदारगंज विधानसभा सीट से राजभर 1991 में पहली बार विधायक बने, तब उन्हें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों व विमुक्त जातियों की समिति का सदस्य बनाया गया। 1993 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद मुलायम व मायावती के मंत्रिमंडल में बतौर राज्यमंत्री शामिल रहे। 1997 में कल्याण सिंह सरकार में मंत्री बने। 2002 में तीसरी बार विधायक बनकर मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 2007 में चौथी बार विधायक बनकर विधानसभा अध्यक्ष चुने गए। 2017 में पांचवीं बार बसपा के विधायक बने। सुखदेव 1982 से 1989 तक अखिल भारतीय राजभर महासंघ के कोषाध्यक्ष रहे और 1989 से महासंघ के अध्यक्ष रहे हैं। माया त्यागी कांड में वे आजमगढ़ के जिला कारागार में 14 दिन बंदी भी रहे।

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