पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे पूर्व राज्यमंत्री शिवबालक पासी का अमेठी में निधन, निमोनिया व लिवर इंफेक्शन का चल रहा था इलाज

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे सलोन के पूर्व विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री शिवबालक पासी का निधन हो गया।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे सलोन के पूर्व विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री शिवबालक पासी का निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। पूर्व विधायक व राज्यमंत्री रहे शिवबालक शनिवार की रात करीब 10 बजे अमेठी जिले के सैदापुर गौरीगंज के सरकारी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

Rafiya NazSun, 16 May 2021 12:58 PM (IST)

रायबरेली, जेएनएन। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के करीबी रहे सलोन के पूर्व विधायक एवं पूर्व राज्यमंत्री शिवबालक पासी का निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। पूर्व विधायक व राज्यमंत्री रहे शिवबालक शनिवार की रात करीब 10 बजे अमेठी जिले के सैदापुर, गौरीगंज के सरकारी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उन्हें निमोनिया व लिवर इंफेक्शन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इनके पुत्र राजबहादुर ने बताया कि गुरुवार को हालत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल व डीआरडीओ अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बेड न होने की वजह से अमेठी जिले के सैदापुर में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार की रात इनका देहांत हो गया।

सलोन तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा थौरी निवासी पूर्व राज्य मंत्री शिव बालक पासी एक सरल स्वभाव मृदुभाषी और ज़मीनी स्तर के नेता थे। अंतिम बार 2007 में विधानसभा सलोन से कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ा था। समाजवादी पार्टी की नेता आशा किशोर को हरा कर जीत दर्ज की थी।

प्रधान से राज्यमंत्री तक का सफर किया था: पूर्व राज्य मंत्री का राजनीतिक जीवन काफी संघर्ष से भरा रहा। पहली बार 1972 में पंचायत चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। 1972 से लगातार 1980 तक प्रधान रहे। उसके बाद 1980 में पहली बार कांग्रेस पार्टी से विधायक बने। इसी सरकार में राज्यमंत्री समाज कल्याण बने। 

पांच बार विधायक बन जनता का जीता भरोसा: पूर्व राज्य मंत्री अपने सरल स्वभाव के कारण जनता के काफी करीबी थे। यही वजह था कि वे सलोन विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक बने।1980 के बाद 1985 मे दोबारा विधायक बने। कांग्रेस सरकार में कृषि राज्यमंत्री बने। इसके बाद 1989 में तीसरी बार विधायक , 1991 में चौथी बार व 2007 में पांचवीं बार विधायक बने।

मेरी चिता की राख इन दो समाधियों में रखवाना: बेटे राजबहादुर ने बताया कि अपने जीते जी ही पिता जी ने अपने लिए दो समाधियां बनवाई थी। एक समाधि रहीमगंज के पास तो दूसरी गांव के बाहर बनवाई। वे कहते थे कि मेरी जब मौत हो दोनों जगह चिता की राख रख देना।

 

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