कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर एसजीपीजीआइ के विशेषज्ञ बोले, वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है तो घबराएं नहीं

कोरोना वायरस के बचाव में अगर दो टीके आप को लग चुके हैं तो नए कोरोना वायरस को लेकर बहुत भयभीत न हों। हां मानकों का पालन जरूर करें। संजय गांधी पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्टों का कहना है कि नए उत्परिवर्ति वायरस को लेकर काफी भय देखा जा रहा है।

Vikas MishraFri, 03 Dec 2021 03:24 PM (IST)
एसपीजीआइ के क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्टों का कहना है कि नए उत्परिवर्ति वायरस को लेकर भय देखा जा रहा है।

लखनऊ, [कुमार संजय/रामांशी मिश्रा]। कोरोना वायरस के बचाव में अगर दो टीके आप को लग चुके हैं तो नए कोरोना वायरस को लेकर बहुत भयभीत न हों। हां, मानकों का पालन जरूर करें। संजय गांधी पीजीआई के क्लीनिकल इम्यूनोलाजिस्टों का कहना है कि नए उत्परिवर्ति वायरस को लेकर काफी भय देखा जा रहा है। यह भय मानिसक स्थिति प्रभावित कर सकता है। सार्स –सीओवी-2 के नए वैरिएंट ओमिक्रोन का पता लगने के बाद के बाद आज प्रमुख प्रश्नों में से एक है कि क्या वैक्सीन नए पाए गए कोरोनावायरस संस्करण के खिलाफ काम करेगा। 

वायरस के स्पाइक प्रोटीन को लक्ष्य करता है टीकाः टीके वायरस के स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र को लक्षित करते हैं। यह कोरोनावायरस का वह हिस्सा है जिसका उपयोग वायरस मानव कोशिका में प्रवेश करने के लिए करता है।

टीके वायरस के स्पाइक प्रोटीन की पहचान करने के लिए मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करके काम करते हैं और जब वायरस शरीर में प्रवेश करने की कोशिश करता है तो उस पर हमला करते हैं।

नए वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक बदलावः प्रो. विकास अग्रवाल कहते है कि ओमिक्रोन वैरिएंट में जो देखा गया है कि इसके स्पाइक प्रोटीन में 30 से अधिक म्यूटेशन है। इनमें से दस उत्परिवर्तन को रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन या स्पाइक प्रोटीन के आरबीडी में देखा गया है। आरबीडी स्पाइक प्रोटीन का वह हिस्सा है जो मानव कोशिका से जुड़ता है। एक अत्यधिक उत्परिवर्तित आरबीडी शरीर की प्रतिरक्षा चकमा दे सकता है हालांकि स्पाइक प्रोटीन कोरोनावायरस का एकमात्र हिस्सा नहीं है जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली पहचानती है और लक्षित कर सकती है। एंटीबॉडी और टी कोशिकाएं विशिष्ट कोशिकाएं हैं जो संक्रमण या टीकाकरण के जवाब में शरीर में विकसित होती हैं। यह एक उत्परिवर्तित वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं। यह ओमिक्रोन संस्करण के लिए भी सही है।

टीके कितनी सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं?

प्रो. दुर्गा प्रसाद प्रसन्ना कहते है कि डेल्टा संस्करण से अभी तक संक्रमित टीकाकरण के मामले में, कोविड -19 रोगियों के मरने की संभावना नौ गुना कम थी। यह भी कहा गया था कि पूरी तरह से टीका लगाए गए लोगों में बिना टीकाकरण वाले लोगों की तुलना में संक्रमण को पकड़ने की संभावना तीन गुना कम होती है। डा. पंक्ति मेहता कहती है कि पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों के मामले में, जो डेल्टा संस्करण से संक्रमित थे, सुरक्षा बेहतर प्रतीत होती है। यदि आपको डबल-डोज किया गया है और फिर डेल्टा से संक्रमित हो चुके है और ठीक हो गए है, तो आपको एक बहुत व्यापक, बहुत प्रभावी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया मिली है, जो शायद किसी भी प्रकार के कोरोना वायरस को कवर करती है। कारण बहुत सरल है। ऐसे व्यक्तियों को चीन के वुहान में कोविड -19 मूल वायरस के खिलाफ टीका लगाया गया था और उन्होंने उत्परिवर्ती डेल्टा संस्करण के कारण प्राकृतिक प्रतिरक्षा भी विकसित की थी। इसका अर्थ है कि आपको एक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया मिली है जो पारंपरिक और आधुनिक दोनों उपभेदों और व्यापक टी सेल प्रतिक्रिया को कवर करती है।

बिना टीका वालों के लिए अधिक चिंता

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रक्त कैंसर विभाग के अध्यक्ष प्रो एके त्रिपाठी कहते हैं कि दक्षिण अफ्रीका से मिली जानकारी के अनुसार यह वैरिएंट अधिक गंभीर नहीं लगता है। जो लोग अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं उनमें टीकाकरण नहीं हुआ है। दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञों का कहना है कि असली चिंता उन लोगों के लिए बनी हुई है जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। उनके पास ओमिक्रोन के प्रकार के खिलाफ प्राकृतिक या टीकाकृत प्रतिरक्षा नहीं है, इसलिए इसे अधिक संक्रामक कहा जाता है।

प्रो त्रिपाठी के अनुसार भारत में ओमिक्रोन की दस्तक हो चुकी है और इससे बचाव के लिए जरूरी है कि कोविड प्रोटोकाल का पालन किया जाए। मास्क लगाएं और भीड़भाड़ से बच कर रहें। टीकाकरण की यदि एक डोज लगी है तो दूसरी डोज भी समय पर लगवा लें। साथ ही बच्चों में टीकाकरण नहीं हुआ है ऐसे में उनके साथ ज्यादा सावधानी बरती जानी चाहिए।

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