उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कोर्ट में दर्ज कराई गवाही, यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष के खिलाफ दाखिल किया था परिवाद

परिवाद के मुताबिक अजय कुमार लल्लू ने कहा था कि गरीब जनता की बिजली कुछ सौ और हजार रुपये के बकाए पर कटवा देने वाले मंत्री जी विभाग के खजाने से हजारों करोड़ रुपये देश द्रोहियों दाउद इब्राहिम व इकबाल मिर्ची से जुड़ी कंपनियों को देते हैं।

Anurag GuptaMon, 27 Sep 2021 10:04 PM (IST)
उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के खिलाफ दाखिल किया था परिवाद।

लखनऊ, विधि संवाददाता। उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मानहानि के एक मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए की विशेष अदालत में अपनी गवाही दर्ज कराई। उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू इस मामले में अभियुक्त हैं। विशेष जज पवन कुमार राय ने अंतिम अवसर देते हुए अभियुक्त की ओर से जिरह के लिए चार अक्टूबर की तारीख तय की है। उन्होंने उस रोज श्रीकांत शर्मा को अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

यह है मामला : श्रीकांत शर्मा ने अजय कुमार लल्लू के खिलाफ मानहानि के मामले में एक परिवाद दाखिल किया था। परिवाद में आरोप लगाया है कि चार नवंबर, 2019 को विधान परिषद सदस्य व उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में उनके खिलाफ असत्य, दुर्भावनापूर्ण व भ्रामक बयान जारी किया था, जो विभिन्न न्यूज चैनलों पर प्रसारित हुआ। साथ ही अगले दिन अनेक समाचार पत्रों में भी उनका बयान प्रकाशित हुआ, जिसे आमजनमानस द्वारा देखा व पढ़ा गया।  

परिवाद के मुताबिक अजय कुमार लल्लू ने कहा था कि गरीब जनता की बिजली कुछ सौ और हजार रुपये के बकाए पर कटवा देने वाले मंत्री जी विभाग के खजाने से हजारों करोड़ रुपये देश द्रोहियों दाउद इब्राहिम व इकबाल मिर्ची से जुड़ी कंपनियों को देते हैं। इस बात की जांच की जानी चाहिए कि सितंबर व अक्टूबर 2017 में उर्जा मंत्री किस प्रयोजन से दुबई गए थे और वहां किन-किन लोगों से मुलाकात की। यह दौरा उसी समय किया जब डीएचएफएल का पैसा सनब्लिंक कंपनी को जा रहा था। उर्जा मंत्री अपने 10 दिन के इस आधिकारिक यात्रा का उद्देश्य बताएं। डीएचएफएल के साथ सांठ-गांठ करके उर्जा विभाग के कर्मचारियों की भविष्य निधि का पैसा डीएचएफएल को दे दिया गया, जो जोखिम में पड़ गया। सात फरवरी 2020 को विशेष अदालत ने इस परिवाद पर संज्ञान लेते हुए बतौर अभियुक्त अजय कुमार लल्लू को आइपीसी की धारा 500 के तहत अपराध के विचारण के लिए जरिए समन तलब किया था।

 

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