Constituent University: यूपी में निजी महाविद्यालय के रूप में चलेंगे आठ कालेज, मिली सशर्त अनुमति

यूपी के आठ कालेज संघटक महाविद्यालय के रूप में संचालित होंगे। ये कालेज चार राज्य विश्वविद्यालयों के तहत आते हैं। उच्च शिक्षा की अपर मुख्य सचिव ने चारों के कुलपतियों को सशर्त अनुमति के संबंध में निर्देश जारी कर दिया है।

Rafiya NazThu, 29 Jul 2021 01:49 PM (IST)
यूपी में शासन ने चार विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा निर्देश।

लखनऊ राज्य ब्यूरो। प्रदेश के आठ कालेज संघटक महाविद्यालय के रूप में संचालित होंगे। ये कालेज चार राज्य विश्वविद्यालयों के तहत आते हैं। उच्च शिक्षा की अपर मुख्य सचिव ने चारों के कुलपतियों को सशर्त अनुमति के संबंध में निर्देश जारी कर दिया है। इन महाविद्यालयों में इसी शैक्षिक सत्र से शिक्षण कार्य शुरू होना है। सभी कालेजों में नियुक्त शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारी राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं होंगे।

सरदार भगत सिंह राजकीय महाविद्यालय ढाका पुवायां शाहजहांपुर, राजकीय महाविद्यालय मीरापुर बंगर बिजनौर, राजकीय महाविद्यालय भदपुरा नवाबगंज बरेली, राजकीय महाविद्यालय कटरा चुग्घूपुर सुलतानपुर, राजकीय महिला महाविद्यालय परसवां खंडासा मिल्कीपुर अयोध्या, राजकीय महाविद्यालय भवानीपुर कला गोंडा, राजकीय महिला महाविद्यालय शेख सराय सीतापुर और राजकीय महाविद्यालय रसूलपुर रूरी उन्नाव में यह व्यवस्था लागू होगी। शासन ने बीती 15 जनवरी को प्रदेश के 12 राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति को निर्देश दिया था कि सुलतानपुर व उन्नाव जिले में राजकीय महाविद्यालय बनकर तैयार है, जबकि 72 राजकीय महाविद्यालय निर्माणाधीन हैं। नवनिर्मित व निर्माणाधीन महाविद्यालयों को संबंधित राज्य विश्वविद्यालय के तहत संघटक महाविद्यालय के रूप में चलाने का निर्णय लिया गया है। शासन ने कुलपतियों से कार्ययोजना सहित कालेजों को संचालित करने का प्रस्ताव मांगा था। उनमें से चार महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली, डा.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या, लखनऊ विश्वविद्यालय और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपतियों ने आठ संघटक महाविद्यालयों को संचालित करने का प्रस्ताव भेजा।

अपर मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा विभाग) मोनिका एस गर्ग ने महाविद्यालयों को संचालित करने के लिए सशर्त अनुमति दी है। इसमें कालेजों पर विश्वविद्यालयों का पूर्ण प्रशासकीय, वित्तीय व शैक्षणिक नियंत्रण रहेगा। महाविद्यालय का भवन, साज-सज्जा व भूमि व भंडार आदि विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किए जाएंगे। भूमि महाविद्यालय के उपयोग में ही लाई जाएगी। छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट भी विश्वविद्यालय देगा। संघटक महाविद्यालय में प्राचार्य का पद रहेगा। पंजीकृत छात्रों, अधीनस्थ कर्मचारियों के अनुशासन व सामान्य नियंत्रण का अधिकार प्राचार्य को रहेगा।

यह भी निर्देश दिया गया कि महाविद्यालयों की जरूरत के अनुसार शैक्षणिक व शिक्षणेतर कर्मचारियों के सृजित पदों पर संविदा के माध्यम से नियुक्तियां विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारी करेंगे। विश्वविद्यालय स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों से होने वाली आय से शिक्षक व कर्मचारियों का वेतन देंगे। महाविद्यालयों की आधारभूत संरचना और फर्नीचर आदि पर होने वाले सभी खर्च विश्वविद्यालय वहन करेगा। परीक्षा कराना और परिणाम घोषित करना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी होगी।

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