RBI का फरमान, एफडी धारक परेशान; कोरोना काल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए खड़ी की मुसीबत

आरबीआइ की ओर से दो जुलाई को गुपचुप तरीके से जारी किए गए सर्कुलर पर मंगलवार को दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद एफडी धारक परेशान नजर आए। खासकर बुजुर्ग। खबर से हुई जानकारी के बाद वरिष्ठ नागरिक व आम ग्राहक एफडी रीन्यू कराने अपने बैंक पहुंचे।

Vikas MishraWed, 07 Jul 2021 09:00 AM (IST)
आरबीआइ का यह निर्णय हर एफडी धारक के लिए परेशानी भरा है।

लखनऊ, [पुलक त्रिपाठी]। आरबीआइ की ओर से दो जुलाई को गुपचुप तरीके से जारी किए गए सर्कुलर पर मंगलवार को दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद एफडी धारक परेशान नजर आए। खासकर बुजुर्ग। खबर से हुई जानकारी के बाद वरिष्ठ नागरिक व आम ग्राहक एफडी रीन्यू कराने अपने बैंक पहुंचे। यही कारण रहा कि बैंकों में ऐसे लोगों की भीड़ भी रही। लोगों ने कोरोना काल में आरबीआइ के इस निर्णय पर नाराजगी भी जाहिर की। लोगों का कहना था कि आरबीआइ का यह निर्णय हर एफडी धारक के लिए परेशानी भरा है। सबको पता था कि बैंक में कराई गई एफडी को बैंक आटो रीन्यू कर देते हैं।

आरबीआइ का यह सर्कुलर बुजुर्गों के लिए समस्या खड़ी कर देगा। कोरोना काल में हम लोग कहां बार बार बैंक आ सकते हैं। आरबीआइ को इसे वापस लेना चाहिए। -भारत प्रकाश, पेंशनधारक

एक तो बैंक पहले से ही एफडी पर काफी कम ब्याज दे रहे हैं। ऐसे में यह सरासर गलत है। ऑटो रीन्यूवल की व्यवस्था पहले से है, वही आगे भी रहनी चाहिए। आरबीआइ को इस निर्णय को तत्काल वापस लेना चाहिए। अन्यथा सरकार को इसमें हस्तक्षेप कर इस निर्णय को वापस कराना चाहिए। -हरिहर सिंह, पेंशन धारक

आरबीआइ का यह निर्णय खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए परेशानी भरा है। यह निर्णय सरकार के बुजुर्गों को घर पर बैंकिंग सुविधा मुहैया कराने के प्रयास पर पानी फेर रहा है। इस निर्णय के पीछे आरबीआइ की क्या मंशा है पता नहीं, मगर यह जरूर है कि इससे लोगों को घर से बाहर निकलने पर मजबूर किया जा रहा है। -एसपी सिंह, पेंशन धारक

आरबीआइ को कोई भी निर्देश जारी करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए। अगर कोई एक साल के लिए एफडी कराता है और मियाद पूरी होने पर वह रीन्यू कराने बैंक नहीं पहुंच पाता है तो उसे ऑटो रीन्यू कर देना चाहिए। यही व्यवस्था थी। इससे आरबीआइ को क्या समस्या। -सहदेव मिश्र, पेंशन धारक

हमारे ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत नहीं। हमारे यहां एफडी के ऑटो रीन्यू की ही व्यवस्था है। अगर ग्राहक ने एक साल या किसी भी अवधि के लिए एफडी कराई है तो मियाद पूरी होने के बाद उसकी एफडी ऑटो रीन्यू हो जाएगी। -अजय कुमार खन्ना, मुख्य महाप्रबंधक, एसबीआइ

ग्राहक द्वारा एफडी बनवाते समय ही यह पूछ लिया जाता है कि मियाद पूरी होने के बाद रकम को बचत खाते में ट्रांसफर कर दिया जाए, ताकि एफडी रीन्यू कर दी जाए। ग्राहक द्वारा जो निर्णय लिया जाता है, वही बैंक अपने सिस्टम में मार्क कर देता है। सिस्टम उसे उतने ही समय के लिए ऑटो रीन्यू कर देता है। -बृजलाल, महाप्रबंधक, बैंक ऑफ इंडिया

ऑटो रीन्यूवल के निर्देश का पूरा पालन किया जाएगा। मतलब जिन ग्राहकों ने ऑटो रीन्यूवल का विकल्प चुना है, उन्हें उसका लाभ मिलेगा, मगर जिन्होंने नहीं चुना है, उन्हें मियाद पूरी होने पर कंट्रेक्टेड रेट (जिस अवधि के लिए एफडी बनाई गई, उस दरम्यान का ब्याज) या बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज में जो कम होगा, वह दिया जाएगा। -संजय गुप्ता, महाप्रबंधक, पंजाब नेशनल बैंक

खबर से आरबीआइ में खलबलीः दैनिक जागरण में मंगलवार को आरबीआइ के 2 जुलाई 2021 फरमान के हवाले से 'एफडी रीन्यू न की तो साधारण ब्याज दरÓ शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद आरबीआइ लखनऊ से लेकर आरबीआइ मुंबई तक खलबली का माहौल रहा। जन सरोकार से जुड़े इस संवेदनशील प्रकरण पर आरबीआइ के क्षेत्रीय अधिकारियों ने कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।

बैंक अधिकारियों की दलील

ऑटो रीन्यूवल के लिए एफडी कराते समय ग्राहक को ऑटो रीन्यू का विकल्प अनिवार्य रूप से चुनना होगा। अगर एफडी धारक ने ऑटो रीन्यू नहीं कराया तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा। उस जमा रकम पर बैंक द्वारा बचत खाते जितना ही ब्याज (साधारण ब्याज) मिलेगा।

ये सवाल हैं, जवाब आरबीआइ दे

यदि किसी एफडी धारक की एफडी की मियाद 30 जून को समाप्त हो गई है, तो उसे क्या करना पड़ेगा? क्या उसे एफडी रीन्यू कराने के लिए अपने संबंधित बैंक जाना पड़ेगा? आरबीआइ का एफडी संबंधित सर्कुलर कब से प्रभावी माना जाएगा? उदाहरण के लिए यदि किसी ग्राहक की एफडी की मियाद 30 जून को पूरी हो रही है, इधर आरबीआइ ने दो जुलाई को इस संबंध में मास्टर सर्कुलर जारी कर दिया। ऐसे में 2 जुलाई के बाद मे'योर होने वाली एफडीआर पर यह निर्णय लागू होगा, या फिर 30 जून या इससे पहले सभी एफडी धारकों के लिए। स्पष्ट करें। क्या कोरोना काल के दौरान आरबीआइ द्वारा ऐसा निर्देश जारी करना उचित है, तब जब सरकार तीसरी लहर के संभावित खतरे के चलते हर किसी से घर पर रहने की अपील कर रही है? आरबीआइ के इस निर्देश का असर सबसे ज्यादा बुजुर्गों (वरिष्ठ नागरिकों )पर पड़ेगा। इसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह उनकी परेशानी को बढ़ाने वाला निर्णय तो नहीं है? अभी तक बैंकों में एफडी की मियाद पूरी होने पर हर किसी को यही जानकारी रहती है कि एफडी का रीन्यूवल ऑटोमेटिक हो जाएगा। इससे एफडी धारक को बैंक आने की परेशानी भी नहीं उठानी पड़ती थी और बैंक अधिकारियों को भी अधिक समय व्यर्थ नहीं करना पड़ता था? इस पर आरबीआइ का क्या कहना है?

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