बाघों के बेहतर संरक्षण व रखरखाव में दुधवा टाइगर रिजर्व अव्‍वल, मिली CATS की मान्यता

वर्ष 2013 में यह प्रमाणन शुरू हुआ था। इसमें बाहर की एजेंसियां व विशेषज्ञ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर टाइगर रिजर्व के प्रबंधन का मूल्यांकन करते हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पवन कुमार शर्मा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सभी को बधाई दी है।

Rafiya NazSat, 31 Jul 2021 08:12 AM (IST)
दुधवा टाइगर रिजर्व को मिली कैट्स की मान्यता।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। दुधवा टाइगर रिजर्व को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन कैट्स (कंजरवेशन एश्योर्ड टाइगर स्टैंडर्ड) की मान्यता मिल गई है। यह सम्मान टाइगर रिजर्व के बेहतर संरक्षण व रखरखाव के लिए दिया गया है। इस प्रमाणन के मिलने से यह सिद्ध होता है कि दुधवा टाइगर रिजर्व का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा रहा है।

वर्ष 2013 में यह प्रमाणन शुरू हुआ था। इसमें बाहर की एजेंसियां व विशेषज्ञ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर टाइगर रिजर्व के प्रबंधन का मूल्यांकन करते हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पवन कुमार शर्मा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए सभी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि दुधवा टाइगर रिजर्व की यह उपलब्धि बाघ संरक्षण के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयास व जैव विविधता संरक्षण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व एम स्ट्राइप्स एप का उपयोग करते हुए वन क्षेत्रों में प्रभावी गश्त करने के मामले में देश में अग्रणी रहा है। साथ ही क्षेत्र के वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन पर भी भरपूर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि देश के टाइगर रिजर्व में अंतरराष्ट्रीय तौर पर प्रतिष्ठित यह उपलब्धि प्राप्त करना उत्तर प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। वन विभाग अपने राष्ट्रीय पशु बाघ एवं उसके प्राकृतवास संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि दुधवा के अलावा देश के 13 अन्य टाइगर रिजर्व को भी यह सम्मान मिला है।

बाघों की संख्या में हुई जबरदस्त वृद्धि: दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। यह सब हो रहा है उनके बेहतर संरक्षण के कारण। टाइगर रिजर्व के तीनों डिवीजनों यानी दुधवा में 20, किशनपुर सेंचुरी में 33 और कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग बहराइच में 29 बाघों का बसेरा है। इसके अलावा 25 ऐसे बाघ चिन्हित हुए हैं जो पार्क एरिया के बफरजोन या किशनपुर सेंचुरी के समीपवर्ती गन्ने के खेतों में रहते हैं। जंगल से बाहर रहने वाले बाघों में सबसे ज्यादा 12 बाघ महेशपुर, गोला के सिकंदरपुरए उत्तर निघासन के मझरा पूरब और किशनपुर इलाके में घूम रहे हैं। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में दो साल पहले कराए गए कैमरा ट्रैपिंग में एक भी बाघ नहीं मिला था। लगातार संरक्षण व संवर्धन के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ रही है। फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बाघों की संख्या में बढ़ोतरी को बड़ी उपलब्धि माना है। उन्होंने कहा कि पार्क कर्मियों की मेहनत व विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से हम बाघों के साथ तमाम वन्यजीवों का कुनबा बढ़ा पाने में सफल हुए हैं। यह निरंतरता बनी रहे इसके प्रयास किए जा रहे हैं।

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