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प्लाज्मा थेरेपी पर लगी सभी तरह की बंदिशें खत्म, अतिगंभीर मरीजों में थेरेपी का रास्ता साफ

लखनऊ, जेएनएन। कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी पर लगी सभी तरह की बंदिशें खत्म अब खत्म हो गईं। केंद्र सरकार के बाद ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने भी 'ऑफ लेबल प्लाज्मा थेरेपी' की अनुमति दे दी है। ऐसे में केजीएमयू में आइसीएमआर ट्रायल के अलग भी मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा सकेगी। इससे अतिगंभीर मरीजों को काफी राहत मिलेगी।

केजीएमयू-पीजीआइ समेत देश के 50 सेंटरों को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति दी है। इन संस्थानों में अभी तक आइसीएमआर की तय गाइडलाइन के अनुसार मरीजों का चयन किया जाता है। डॉक्टर मरीज और तीमारदार की सहमति लेकर ब्यौरा आइसीएमआर के पोर्टल पर अपलोड करते हैं। रेंडम तरीके से मरीज का चयन किया जाता है। यह मरीज मॉडरेट श्रेणी के होते हैं।

अतिगंभीर मरीज समेत कई प्लाज्मा थेरेपी से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जून अंत में पहली बार लिखित में 'ऑफ लेबल' प्लाज्मा थेरेपी को मंजूरी दी है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा के मुताबिक अब ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया से भी अनु म ति मिल गई है। तीमारदार यदि अपने मरीज का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज कराना चाहता है, तो उसे इंकार नहीं किया जा सकता है।

केजीएमयू को अब ऑफ लेबल प्लाज्मा थेरेपी का आदेश मिल गया है। गंभीर मरीजों को मिली राहत आइसीएमआर के ट्रायल के तहत प्लाज्मा थेरेपी सिर्फ को विड-19 के मरीजों पर ही चढ़ती है। यह मॉडरेट श्रेणी के मरीज होते हैं। वहीं अब डायबिटीज, गुर्दा, हृदय, कैंसर जैसी बीमारी से घिरे कोरोना के मरीजों को भी प्लाज्मा थेरेपी दी जा सकेगी। ऑफ लेबल थेरेपी में मॉडरेट के साथ-साथ सीवियर मरीजों का भी शामिल हैं।  

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