DR Sugestions on Coronavirus: लक्षण गंभीर हैं तो होम आइसोलेशन ठीक नहीं, जान‍िए क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

दैनिक जागरण फाइव पीएम टाॅक फेसबुक लाइव में डा विकासेंदु अग्रवाल ने दी जानकारी

ये दिक्कत देखी गई है कि किसी घर में एक ज्यादा लोग पाॅजिटिव हो गए और उनके यहां इतने कमरे नहीं कि सब अलग-अलग रहें। इस स्थिति में जितने पाॅजिटिव लोग हैं वह एक साथ रह सकते हैं एक बाथरूम में प्रयोग कर सकते हैं।

Anurag GuptaTue, 11 May 2021 12:07 PM (IST)

लखनऊ, जेएनएन। दैनिक जागरण फाइव पीएम टाॅक फेसबुक लाइव में सोमवार को कोविड में होम आइसोलेशन के बारे में जानकारी दी गई। आनलाइन कार्यक्रम में विशेषज्ञ के तौर पर स्वास्थ्य विभाग के स्टेट सर्विलांस आफिसर डा विकासेंदु अग्रवाल मौजूद रहे। यूनिसेफ के स्वास्थ्य अधिकारी डा निर्मल सिंह ने भी होम आइसालेशन पर बात की। डा विकासेंदु ने कहा कि आइसोलेशन का मतलब है-पृथक रखना। कोविड के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो कोई कोरोना पाॅजिटिव आता है तो उसे घर पर एक निश्चित समय के लिए सबसे अलग होकर रहना होगा। अलग रहने का मतलब है कि उसका अलग कमरा, अलग बाथरूम और अलग बर्तन होने चाहिए।

कहा, इधर ये दिक्कत देखी गई है कि किसी घर में एक ज्यादा लोग पाॅजिटिव हो गए और उनके यहां इतने कमरे नहीं कि सब अलग-अलग रहें। इस स्थिति में जितने पाॅजिटिव लोग हैं, वह एक साथ रह सकते हैं, एक बाथरूम में प्रयोग कर सकते हैं। वहीं, जितने निगेटिव लोग हैं, वह एक साथ एक कमरे में रहें। होम आइसोलेशन के संबंध में सरकार की गाइडलाइन कहती हैं, जिन्हें अस्पताल की जरूरत नहीं, वह घर पर रहकर उपचार करें। उनकी जिम्मेदारी है कि वह घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ करें, उनकी वजह से घर या समाज का कोई व्यक्ति संक्रमित न हो। स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए होम आइसोलेशन के सबंध में तय करें। अगर किसी व्यक्ति के कोई कोरोना से जुड़े लक्षण नहीं हैं, पर जांच पाॅजिटिव आई है तो वह होम आइसोलेशन में रह सकता है। अगर लक्षण गंभीर हैं। कई दिनों तक लगातार तेज बुखार आ रहा, सांस लेने में दिक्कत हो रही तो होम आइसोलेशन में नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया कि सरकार की ओर से इसकी बहुत पुख्ता व्यवस्था की गई है कि होम आइसालेशन के मरीजों को सही सलाह मिले। रोजाना होम आइसोलेशन के मरीजों को फोन किया जाता है। कोविड कमांड सेंटर पर फोन करके चिकित्सकीय परामर्श भी ले सकते हैं। सेंट्ल हेल्पलाइन नंबर 18001805145 और 104 पर फोन करके मरीज अपने उपचार और डाॅक्टर के परामर्श के लिए बात कर सकते हैं। जो सरकारी गाइडलाइन है, उसके हिसाब से दस दिन के बाद अगर वह व्यक्ति लक्षणविहीन है और अगले तीन दिन तक कोरोना का कोई लक्षण नहीं आया तो मानते हैं वह रिकवर कर रहा है। उसे और सात दिन और आइसोलेट रहना पड़ता है।

कई बार पाॅजिटिव आने के 15-20 दिन बाद भी पाॅजिटिव रिपोर्ट आती है, तो इस संबंध में आइसीएमआर का डाटा कहता है कि दस दिन बाद संक्रमण फैलाने की क्षमता उतनी नहीं रहती। 

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