एसीबीटी फिजियोथेरेपी तकनीक से मिलेगा फेफड़ों को दम, जान‍िए कब दी जाती है चेस्ट फिजियोथेरेपी

संक्रमण के दौरान और बाद दोनों में फिजियोथेरेपी से राहत।

डा. त्रिपाठी के मुताबिक हम लोग कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों में रेगुलर विभिन्न तरीके से फिजियोथेरेपी दे रहे है जिसका असर भी दिख रहा है। फिजियोथेरेपिस्ट डा.नीलम मिश्रा के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों में फिजियोथेरेपी सामान्य मरीजों के काफी अलग और चुनौती भरा होता है।

Anurag GuptaWed, 12 May 2021 05:40 PM (IST)

लखनऊ, [कुमार संजय]। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीज जो आईसीयू में भर्ती है उन मरीजों में एक्टिव सायकिल आफ ब्रीथिंग (एसीबीटी) तकनीक फेफड़ों की कार्य शक्ति बढ़ाने में कारगर साबित हो रही है। संजय गांधी पीजीआइ के मुख्य फिजियोथेरेपिस्ट डा. बृजेश त्रिपाठी के मुताबिक आइसीयू में इस तकनीक से दो से चार फीसद तक फेफड़ों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी देखी गई है। इस तकनीक से फेफड़े की नलियां साफ होती है। फेफड़ों में जमाव खत्म या कम होता है।

डा. त्रिपाठी के मुताबिक हम लोग कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों में रेगुलर विभिन्न तरीके से फिजियोथेरेपी दे रहे है, जिसका असर भी दिख रहा है। फिजियोथेरेपिस्ट डा.नीलम मिश्रा के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों में फिजियोथेरेपी सामान्य मरीजों के काफी अलग और चुनौती भरा होता है। इन मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर पहले से कम होता है । फिजियोथेरेपी देते समय शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है। इनमें पहले से आक्सीजन का स्तर कम होता है। इस लिए सबसे पहले पल्स आक्सीमीटर पर नजर रखते हुए हम लोग फिजिकल थेरेपी पर कम करते हुए ब्रीथिंग थेरेपी पर अधिक ध्यान देते है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना से संक्रमित रोगियों को फिजियोथेरेपी के जरिए चेस्ट फिजियोथेरेपी, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, कफिंग एंड हफिंग, पक्र्यूशन (टैपिंग), प्रोनिंग, पोजिशनिंग आदि उपचार दिये जाते हैं, जिनसे उनके ऑक्सीजन स्तर में सुधार होता है, फेफड़े स्वच्छ और मजबूत बनते हैं, साथ ही छाती में मौजूद रक्त-संतुलन भी ठीक होता है। संक्रमित मरीज को स्टीम और स्पाइरोमीटर से ब्रीथिंग थेरेपी काफी फायदा होता है।

संक्रमण के बाद भी जरूरी है फिजियोथेरेपी

विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण खत्म होने के बाद सांस की फिजियोथेरेपी के साथ फिजिकल थेरेपी करने से शरीर और फेफड़े की कमजोरी दूर होती है। इसके लिए किसी से भी फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

कब दी जाती है चेस्ट फिजियोथेरेपी

शुरुआती लक्षणों के दिखते ही एकदम थेरेपी नहीं दी जानी चाहिए। निमोनिया जैसी स्थिति से लेकर कोरोना के गंभीर मरीजों को चेस्ट फिजियोथेरेपी दी जाएगी। सांस लेने में दिक्कत होने पर चेस्ट फिजियोथेरेपी की सलाह दे सकते हैं। इस थेरेपी में एक ग्रुप होता है। इसमें पॉस्च्युरल ड्रेनेज, चेस्ट परफ्यूजन, चेस्ट वाइब्रेशन, टॄनग, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज जैसी कई थेरेपी शामिल होती हैं।

फेफड़ों के अंदर गुब्बारे जैसी संरचना

9 हजार लीटर तक हवा की जरूरत होती सांस लेने के लिए इंसान को हर रोज 17.5 मिलीलीटर पानी बाहर सांस छोड़ते हुए फेंकता है, जब एक इंसान आराम की स्थिति में होता है 30 करोड़ गुब्बारों जैसी संरचना होती है इंसान के फेफड़ों के भीतर

संक्रमित लेटे तो ऐसे

डा.नीलम के मुताबिक कोरोना संक्रमितों के लिए सोने की चार पोजीशन बहुत जरूरी हैं। इसमें 30 मिनट से दो घंटे तक पेट के बल सोएं, 30 मिनट से दो घंटे तक बाएं करवट, 30 मिनट से दो घंटे तक दाएं करवट व 30 मिनट से दो घंटे तक दोनों पैरों को सीधा कर पीठ को किसी जगह टिका कर बैठें। 

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