जहां से हुए रिटायर वहीं से शुरू कर दी मरीजों की सेवा, लखनऊ में कर रहे ग्रामीणों का न‍िश्‍शुल्‍क इलाज

छह साल पहले सेवानिवृत्त के दौरान ग्रामीणों ने उनके जाने का गम मनाना शुरू कर दिया तो उन्होंने कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगा समाज की सेवा करता रहूंगा। आप लोग घबराइए नहीं मैं इसी अस्पताल के पास ही निश्शुल्क इलाज करता रहूंगा।

Anurag GuptaFri, 17 Sep 2021 08:05 AM (IST)
नब्ज देखकर रोग को समझने वाले डा.हाशमी महोना के राजकीय चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी थे।

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। आइए हम आपको एक ऐसी शख्सियत से मिलवाते हैं जिन्होंने जिस सरकारी अस्पताल में नाैकरी की उसी के बगल में सेवानिवृत्त होने के बाद लोगों के इलाज की संकल्प ले लिया। छह साल पहले सेवानिवृत्त के दौरान ग्रामीणों ने उनके जाने का गम मनाना शुरू कर दिया तो उन्होंने कहा कि जब तक मैं जिंदा रहूंगा समाज की सेवा करता रहूंगा। आप लोग घबराइए नहीं मैं इसी अस्पताल के पास ही निश्शुल्क इलाज करता रहूंगा। बस फिर क्या था उनका यह कार्य शुरू हो गया। हम बात कर रहे हैं राजाजीपुरम निवासी सेवानिवृत्त यूनानी चिकित्सक डा.एए हाशमी।

नब्ज देखकर रोग को समझने वाले डा.हाशमी महोना के राजकीय चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी थे। हालांकि उप निदेशक के पद से वह 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद से वह लगातार सेवा के लिए जाते रहे हैं। रोगियों के भगवान कहे जाने वाले डा.हाशमी सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार को अस्पताल के पास बैठकर ग्रामीणों का इलाज करते हैं। उनका कहना है कि सब ऊपर वाले का करम है जो ठीक हो जाता है वही दूसरे को बढ़ाता है। उनके बैठने से पहले की रोगियों की कतार लग जाती है। एक व्यक्ति का नंबर एक से दो घंटे के बाद आता है लेकिन वह समय की फ‍िक्र किए बिना इंतजार करता है। सप्ताह में दो दिन ही सही लेकिन ग्रामीणों को उनके आने का इंतजार रहता है।

कोरोना संक्रमण काल में भी करते रहे इलाज : कोरोना संक्रमण काल में जब चिकित्सालयों में भर्ती होने की जगह नहीं थी। डाक्टर मरीजों को देखना तो दूर छूना पसंद नहीं करते थे, उस दौरान डा.हाशमी ने लोगों को इलाज करके अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। पीपी किट को पहनकर वह घंटों लोगों का इलाज किया करते थे। आर्थिक कमजोर लोगों को तो दवा भी खरीदकर देते हैं।

टेलीमेडिसिन पैनेल में रहे शामिल : कोरोना संक्रमण काल में सरकार की ओर से बनाई गई टेलीकालर टीम में भी वह शामिल होकर फोन से भी लोगों का इलाज करते थे। उनका कहना है कि जीवन में आप अपने पेशे से ईमानदारी करते हैं तो आपका जीवन संवर जाता है। वर्तमान में चिकित्सकों के अंदर आए बदलाव और पैसे की भूख पर टिप्पणी से मना करने वाले डा.हाशमी कहते हैं कि आप क्या कर रहे हैं इस पर सोचना चाहिए। दूसरे पर ध्यान देने से आप अपना कार्य बाधित करते हैं।

रात में लगती है मरीजों की कतार : दिन में समय के अभाव के चलते वह रात में मरीजों को देखते हैं। आलमबाग के सुजानपुरा में जब बाजार बंद होती है तो उनके दवाखाने में मरीजों की कतार लग जाती है। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा के लिए समय मायने नहीं रखता। दिन में भगमभाग में आम लोगों को भी समय नहीं मिलता। एक बार इलाज कराने वाला किसी दूसरे को भेजता है जिससे संख्या बढ़ती रहती है। आलमबाग के रहने वाली संध्या रावत का कहना है कि इनके पास एक बार जाने पर पांच दिन की दवा देते हैं लेकिन दोबारा जाने की जरूरत नहीं पड़ती। संध्या ही नहीं प्रमोद शुक्ला, पवन शर्मा व संजीव मिश्रा समेत कई मरीजों ने इलाज से राहत होने की बात कही है।

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