दिल्ली

उत्तर प्रदेश

पंजाब

बिहार

उत्तराखंड

हरियाणा

झारखण्ड

राजस्थान

जम्मू-कश्मीर

हिमाचल प्रदेश

पश्चिम बंगाल

ओडिशा

महाराष्ट्र

गुजरात

SGPGI Expert Opinion: कोविड मरीज रेमडेसिवीर के पीछे न करें 20 हजार खर्च, दो रुपये की डेक्सामेथासोन भी कारगर

ऑक्सीजन लेवल कम तो कारगर साबित होगा डेक्सामेथासोन।

एसजीपीजीआइ के चिकित्सकों के मुताबिक कोरोना संक्रमित में एआरडीएस रोकने में कोई खास फायदा नहीं है। न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन के हाल के शोध का हवाला देते हुए प्रो. साहू कहते है कि डेक्सामेथासोन सबसे सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा है।

Rafiya NazMon, 19 Apr 2021 03:53 PM (IST)

लखनऊ [कुमार संजय]। कोरोना से संक्रमित अपने परिजन की जान बचाने के लिए रेमडेसिवीर की मुंह मागी कीमत लोग देने को तैयार जिन्होंने किसी तरह पा लिया और लगवा भी दिया क्या वह बच गए यह बडा सवाल है। इस बारे में विशेषज्ञ कहते है कि इस इंजेक्शन का कोई खास फायदा नहीं है इसलिए इस दवा को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता नहीं दिया।

रेमडेसिवीर का वहीं हाल है जैसे वायरल फीवर में एंटीबायोटिक खाओ तो सात दिन में ठीक न खाओ तो भी सात दिन में ठीक.........एआरडीएस रोकने में इसकी कोई भूमिका नहीं है। रिसर्च सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसिया एंड क्लीनिकल फार्माकोलॉजी के सचिव और  संजय गांधी पीजीआइ  के आईसीयू एक्पर्ट प्रो, संदीप साहू ने साफ शब्दों में कहा कि रेमेडिसवीर के पीछे भागने से कोई फायदा नहीं है। डॉक्टर भी तीमारदार को इसके पीछे भागने के रोकें।

कोरोना संक्रमित में एआरडीएस रोकने में कोई खास फायदा नहीं है। न्यू इंग्लैंड जर्नल आफ मेडिसिन के हाल के शोध का हवाला देते हुए प्रो. साहू कहते है कि डेक्सामेथासोन सबसे सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा है। यह दवा एआरडीएस रोकने में काफी कारगर साबित होती है। ऐसा हमने में भी कोरोना मरीजों में देखा है खास तौर पर जिनमें लो ऑक्सीजन की जरूरत है । इनमें यह आठ से दस मिली ग्राम 24 घंटे में एक बार देने से वेंटिलेटर पर जाने के आशंका काफी कम हो जाती है।

शोध वैज्ञानिकों ने दो हजार कोरोना संक्रमित ऐसे मरीजों पर शोध किया जिनमें आक्सीजन लेवल 90 से कम था इन्हें डेक्सामेथासोन देने के बाद 28 दिन बाद परिणाम देखा गया तो पता चला कि इनमें मृत्यु दर कम थी इसके साथ ही वेंटिलेटर की जरूरत कम पडी। रेमडेसिवीर  केवल एक खास वर्ग में राहत दे सकती है।  हाई ऑक्सीजन की जरूरत होती है। यह केवल पहले सप्ताह में ही देने से  राहत की संभावना होती है। इस दवा का कोई खुली स्टडी नहीं है केवल फार्मा इंडस्ट्री द्वारा प्रायोजित शोध ही सामने आए है।

क्या है एआरडीएस: तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों की हवा की थैलियों में तरल जमा हो जाने के कारण अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। गंभीर रूप से बीमार या कोरोना संक्रमित लोगों में सांस संबंधित तंत्र में गंभीर समस्या का सिंड्रोम हो सकता है। यह अकसर घातक होता है। उम्र के साथ खतरा और बीमारी की गंभीरता से बढ़ती जाती है। एआरडीएस से पीड़ित लोगों को गंभीर रूप से सांस की तकलीफ होती है और वेंटीलेटर के सहारे के बिना वे खुद सांस लेने में असमर्थ होते हैं।

एआरडीएस रोकने में कारगर रहा है डेक्सामेथासोन नान कोविड में: प्रो.संदीप साहू कहते है कि नान कोविड मरीज जो आईसीयू में भर्ती होते है उनमें डेक्सामेथासोन एआरडीएस रोकने में कारगर रहा है। ऐसा हजारों मरीजों में देखा गया है। इस दवा की सही मात्रा देने से साइटोकाइन स्टार्म रोकने में सफलता मिलती है। यह एंटी इंफ्लामेटरी गुण वाली दवा है।

क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी विभाग संजय गांधी पीजीआई के हेड प्रो.अमिता अग्रवाल ने बताया कि रेमडेसिविर कोरोना संक्रमित मरीजों में देने से कोई खास फायदा नहीं है ऐसे विश्व स्वास्थ्य संगठन सॉलिडेटरी स्टडी में सामने आयी है। कोरोना संक्रमित मरीजों में एआरडीएस की परेशानी होती है जिसमें फेफडे की कार्य शक्ति कम हो जाती है। आक्सीजन स्तर कम होने के साथ डेक्सामेथासोन , प्रेडनिसोन दवा सही मात्रा में देने से काफी हद कर फेफड़े को बचाया जा सकता है। 

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.