Kartik Purnima 2021: आस्था की डुबकी लगाने को अयोध्‍या में सरयू तट पर उमड़े श्रद्धालु, क‍िया दान पुण्‍य

अयोध्या के सभी मठ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। प्रशासन ने सुरक्षा के किए व्यापक इंतजाम क‍िए थे। कोविड काल में सामूहिक स्नान पर प्रतिबंध के कारण दो साल बाद घाटों पर रौनक द‍िखाई दी। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान दान का है विशेष महत्व।

Anurag GuptaPublish:Fri, 19 Nov 2021 11:15 AM (IST) Updated:Fri, 19 Nov 2021 12:09 PM (IST)
Kartik Purnima 2021: आस्था की डुबकी लगाने को अयोध्‍या में सरयू तट पर उमड़े श्रद्धालु, क‍िया दान पुण्‍य
Kartik Purnima 2021: आस्था की डुबकी लगाने को अयोध्‍या में सरयू तट पर उमड़े श्रद्धालु, क‍िया दान पुण्‍य

लखनऊ, जेएनएन। कार्तिक पूर्णिमा पर अयोध्या में सरयू में सुबह से ही घाट पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और दर्शन पूजन के बाद मंदिरों की तरफ बढ़े। अयोध्या के सभी मठ मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। प्रशासन ने सुरक्षा के किए व्यापक इंतजाम क‍िए थे। कोविड काल में सामूहिक स्नान पर प्रतिबंध के कारण दो साल बाद घाटों पर रौनक द‍िखाई दी। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान दान का है विशेष महत्व। वहीं लखनऊ में गंगा गोमती के घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और गरीबों को दान दिया। कुड़ियाघाट पर पिछले साल के मुकाबले स्नान करने वालों की संख्या कम रही। कोरोना संक्रमण के साथ ही गंदगी होने से भी लोग स्नान करने नहीं आए। झूलेलाल घाट के साथ ही संझिया व अग्रसेन घाट पर भी लोगोें ने स्नान किया।

गोंडा : जिलेभर में कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने सरयू व पोखरे में स्नान ध्यान कर दान पुण्य किया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के किए व्यापक इंतजाम किए हैं। दो साल बाद कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का भी इंतजाम किया गया है।

रायबरेली : कार्तिक पूर्णिमा पर डलमऊ, गेगासो व गोकनाघाट पर भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान कर मंदिरों में दर्शन पूजन कर रहे हैं। वहीं, डलमऊ में पांच दिवसीय मेला भी लगा है। सुरक्षा के लिए पुलिस और पीएसी तैनात है। गोताखोर और नावों की व्यवस्था भी है।

लखनऊ में लक्ष्मण मेला घाट के अलावा खदरा के शिव मंदिर घाट ओम ब्राह्मण समाज के धनंजय द्विवेदी ने स्नान कर आदि गंगा गोमती को निर्मल व स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। कार्तिक पूर्णिमा से करीब डेढ़ महीने तक लगने वाला ऐतिहासिक कतकी मेला भी नजर आया। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि कार्तिक मास की पूर्णिमा गुरुवार को ही लग गई थी। रोहिणी और सर्वार्थ सिद्धि होने से पूर्णिमा खास हो गई। दान पुण्य का विशेष योग होने से लोगों ने स्नान के बाद दान किया।

मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुर नामक असुर का वध कार्तिक पूर्णिमा को ही किया था और श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार भी इसी दिन को हुआ था । इस दिन दान का विशेष पुण्य मिलता है। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि मान्यता है कि भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक का वध कार्तिक पूर्णिमा को ही किया था और श्री विष्णु जी का मत्स्य अवतार भी इसी दिन को हुआ था । देवताओं ने इसी दिन दीपावली मनाई थी। इसलिए इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। आचार्य अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि हर साल दीपावली के 15 दिन बाद और कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली होती है। इस दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है और उनके स्वागत में धरती पर दीप जलाए जाते हैं। सुबह सरोवरों में स्नान के बाद दान पुण्य होता है। शुक्रवार को दोपहर 2:26 बजे तक पूर्णिमा का मान रहा।