व‍िश्‍व की बहुमूल्‍य जड़ीबूटी यार्सागुंबा के उत्पादन में आई कमी, पौरुष शक्ति बढ़ाने संग कई बीमार‍ियों में है लाभप्रद

भारतीय सीमा गौरीफंटा से जुड़े नेपाल के प्रदेश नंबर सात के जिले बझांग की पहाडिय़ों पर यार्सागुंबा पाई जाती है। यह जड़ी बूटी इस जिले के अधिकांश लोगों के रोजगार का साधन भी है। यहां के निवासी इस जड़ी बूटी को बेचकर अपना परिवार चलाते हैं।

Anurag GuptaWed, 20 Oct 2021 07:46 PM (IST)
पिछले साल इसका मूल्य 18.50 लाख (नेपाली मुद्रा) रुपये प्रति किलो था।

लखीमपुर, [हरीश श्रीवास्तव]।  भारत से जुड़े नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली विश्व की सबसे बहुमूल्य बूटी के रूप में पहचान रखने वाली यार्सागुंबा का उत्पादन इस साल काफी कम होने के आसार हैं। उत्पादन कम होने से इसका आयात महंगा हो सकता है। इस बूटी का उपयोग पौरुष शक्ति बढ़ाने वाली दवा बनाने में किया जाता है। भारतीय सीमा गौरीफंटा से जुड़े नेपाल के प्रदेश नंबर सात के जिले बझांग की पहाडिय़ों पर यार्सागुंबा पाई जाती है।

यह जड़ी बूटी इस जिले के अधिकांश लोगों के रोजगार का साधन भी है। यहां के निवासी इस जड़ी बूटी को बीनकर एकत्र करते हैं और फिर उसे बेचकर अपना परिवार चलाते हैं। पहाड़ों पर जब ठंड कम हो जाती है तब जून से सितंबर माह के बीच यार्सागुंबा बूटी को बीनने के लिए पहाड़ी जिले के लोग अपने परिवार के साथ निकलते हैं और तीन से चार माह तक पहाडिय़ों में कड़ी मशक्कत कर उसे एकत्र करते हैं। पिछले साल इसका मूल्य 18.50 लाख (नेपाली मुद्रा) रुपये प्रति किलो था। इस साल इस जड़ी बूटी का मूल्य अभी निर्धारित नहीं हो पाया है। उत्पादन कम होने के कारण इसके दामों में बड़ी वृद्धि होने का अनुमान है। इसका विक्रय मूल्य नेपाल सरकार तय करती है।

बहुमूल्य बूटी यार्सागुंबा देखने में केंचुआ जैसे एक कीड़े की तरह होता है। यह तमाम तरह की बीमारियों की दवा बनाने में काम आता है। इसे पौरुष शक्ति बढ़ाने की सबसे अच्छी दवा बनाई जाती है। इसकी मांग भारत सहित कई देशों में हैं। पर चीन में इसकी सबसे अधिक डिमांड है। इसे संजीवनी कीड़ा भी कहा जाता हैं। इसका उपयोग लीवर, किडनी व श्वास तथा हेपेटाइटिस बी व पुरुषों तथा महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा में प्रयोग किया जाता है। नेपाल सरकार के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनपद बझांग में इसका उत्पादन गत वर्ष की अपेक्षा सात क्वि‍ंटल से कम है। बहुमूल्य बूटी यार्सागुंबा अपने देश में लद्दाख क्षेत्र में पाई जाती है, लेकिन वहां पर इतनी ठंड होती है कि उसे एकत्र करना मुश्किल होता है। इसलिए इसे नेपाल से आयात किया जाता है।

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