Coronavirus News: कोविड में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक को रोकने में सहायक है डी डायमर टेस्ट

डी डायमर टेस्ट बताएगा खून के थक्के तो नहीं बन रहे।

डी डायमर का स्तर बढऩे से कोरोना संक्रमण की नहीं होती है पुष्टि। नया वायरस फेफड़ों पर अटैक करता है इसके अलावा शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिनियों में खून के थक्के जमने से वह अवरुद्ध हो जाती हैं। इस जांच से कोविड को जानलेवा होने से रोका जा सकता है।

Anurag GuptaFri, 07 May 2021 07:00 AM (IST)

लखनऊ, [कुमार संजय]। कोविड के चलते होने वाले हार्ट अटैक ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़े के रक्त वाहिकाओं में रुकावट का कारण खून का थक्का बनना होता है। थक्का बनने की आशंका का पता समय रहते लग जाए तो खून को पतला करने की दवाओं से इसकी रोकथाम की जा सकती है। खून में बनने वाले इसी थक्के की आशंका का पता डी डायमर टेस्ट से की जाती है। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल के सदस्य, आइएमए लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ पैथोलॉजिस्ट डा. पीके गुप्ता के इस ब्लड जांच का संबंध शरीर में सूक्ष्म क्लॉट बनने से हार्ट अटैक एवं ब्रेन स्ट्रोक की आशंका को समय रहते पहचान कर रोका जा सकता है।

डा. गुप्ता का कहना है कि कागुलेशन एब्नार्मेलिटी से जुड़ी यह जांच डिसेमिनेटेड इंट्रा वेस्कुलर कागुलेशन (डीआइसी), डीप वेन थ्रोम्बोसिस( डीवीटी) सहित अन्य परेशानियों में किया जा रहा है। यह जांच कोविड संक्रमण के इलाज के दौरान अन्य इंफ्लामेटरी मार्कर सीआरपी फिरेटेनिन, एलडीएच साथ कराया जा रहा है। डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया इस जांच से कोरोना के संक्रमण का पता नहीं लगता है। कई दूसरी परेशानियों में भी इसका स्तर बढ़ जाता है। दरअसल, नया वायरस फेफड़ों पर अटैक करता है, इसके अलावा शरीर की सूक्ष्म रक्त वाहिनियों में खून के थक्के जमने से वह अवरुद्ध हो जाती हैं। इस जांच से कोविड को जानलेवा होने से रोका जा सकता है।

क्या है डी डायमर

डी डायमर ब्लड में माइक्रो क्लॉट्स से बनने वाला प्रोटीन होता है जिसे फिबरिन डी जनरेशन प्रोडक्ट भी कहते है। यह शरीर के अंदर सामान्य रक्त के थक्का बनाने की क्रिया का पार्ट होता है, लेकिन शरीर मे संक्रमण अथवा सूजन के कारण कई पैथोलॉजिकल कंडीशन मे यह मात्रा बढ़ जाती है। ब्लड मे इसी माइक्रो क्लाट प्रोटीन की मात्रा मापने के लिए डी डायमर टेस्ट किया जाता है।

निमोनिया में बढऩे की रहती है आशंका

कोविड संक्रमण में निमोनिया होने की संभावना पर डीआइसी की आशंका रहती है। समय से टेस्ट हो जाए तथा एब्नार्मल माइक्रो क्लाट बनने की पहचान हो जाने पर हम इसके गंभीर परेशानी जैसे लंग में सीवियर निमोनिया हार्ट अटैक तथा ब्रेन स्ट्रोक से मरीज को बचा सकते है। इसकी मात्रा बढ़ी होने पर रक्त में महीन थक्के को गलाने के लिए और बनने से रोकने के लिए खून पतला करने की दवा देते हैं। यह जांच मरीज को अपने चिकित्सक के सलाह पर ही करना चाहिए। ब्लड का नमूना विशेष सावधानी के साथ लाइट ब्लू रंग के साइट्रेट ट्यूब में एक निश्चित मात्रा में लिया जाता है यह टेस्ट लैब में पहुचने बाद शीघ्र शुरू किया जाता है, इसके लिए जरूरी है कि यथासंभव मरीज का सैंपल आसपास ही पैथोलॉजिस्ट डाक्टर द्वारा संचालित लैब में देना चाहिए। अन्यथा बहुत दूर सैंपल ट्रांसपोर्ट करने से जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। यह जांच एबनार्मल क्लाट के डायग्नोसिस के साथ इलाज के प्रभाव को मॉनीटर करने के लिए भी कई बार कराया जाता है।

सामान्य में 500 से रहता है कम

डी डायमर की नार्मल रेंज स्वस्थ व्यक्ति मे सामान्य 500 नैनो ग्राम प्रति एमएल होता है। कोविड संक्रमण मे लंग्स में निमोनिया तथा माइक्रो वैस्कुलर इंजरी के कारण के कारण अधिक मात्रा मे एब्नार्मल माइक्रोक्लाट बनने से बनने से बढ़ी हुई आ सकती है, यदि वैल्यू सामान्य से दो गुना से ज्यादा है तो यह अलाॄमग सिग्नल होता है जो गंभीर मरीजों में हार्ट अटैक तथा ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है । 

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