यूपी के मेडिकल कॉलेजों में नवंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू होगी MBBS काउंसिलिंग, जानिए प्रक्रिया...

एमबीबीएस व बीडीएस में दाखिले के लिए काउंसिलिंग नवंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू करने की तैयारी है।
Publish Date:Thu, 29 Oct 2020 10:25 PM (IST) Author: Umesh Tiwari

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए काउंसिलिंग नवंबर के दूसरे हफ्ते से शुरू करने की तैयारी की जा रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अभ्यर्थियों के अभिलेखों के सत्यापन के लिए 27 नोडल सेंटर बनाए हैं। 18 नोडल सेंटरों पर सरकारी कॉलेजों और नौ नोडल सेंटरों पर निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन किया जाएगा। नीट 2020 की प्रवेश काउंसिलिंग में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को दो हजार रुपये पंजीकरण शुल्क देना होगा। मॉपअप राउंड का पंजीकरण शुल्क एक हजार रुपये होगा। 

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने काउंसिलिंग के लिए किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के परीक्षा नियंत्रक डॉ.अनूप कुमार वर्मा को परामर्शदाता व केजीएमयू के ही फिजियोलॉजी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ.संदीप भट्टाचार्य को अतिरिक्त परामर्शदाता बनाया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ.रजनीश दुबे की ओर से प्रवेश के लिए नीति निर्धारित करते हुए काउंसिलिंग की तैयारी शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

30 हजार रुपये सिक्योरिटी मनी : सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस कोर्सेज में दाखिले के लिए 30 हजार रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। वहीं निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स में दाखिले के लिए दो लाख रुपये और निजी डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक लाख रुपये धरोहर राशि जमा करनी होगी। ऐसे अभ्यर्थी जो सीट आवंटन के बाद दाखिला ले लेंगे उन्हें यह धरोहर राशि वापस कर दी जाएगी। जो अभ्यर्थी सीट आवंटन के बाद दाखिला नहीं लेंगे, उनकी यह राशि जब्त कर ली जाएगी। पहले चरण की काउंसिलिंग के बाद दूसरे चरण की काउंसिलिंग में भाग लेने के लिए दोबारा सिक्योरिटी मनी नहीं जमा करनी होगी। वहीं चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डॉ.केके गुप्ता की अध्यक्षता में काउंसिलिंग बोर्ड का भी गठन कर दिया गया है।

अभ्यर्थियों को भरना होगा दस लाख का बांड : सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस कोर्स में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों से दो साल की शासकीय सेवा का बांड भरवाया जाएगा। बांड की धनराशि दस लाख रुपये होगी। उन्हें पढ़ाई पूरी करने पर महानगरों को छोड़कर जिलों में स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेजों में नॉन पीजी जेआर या फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संविदा चिकित्सा अधिकारी के रूप में कार्य करना होगा।

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