Lucknow COVID -19 News Update: लखनऊ में कोरोना मरीजों के शव ले जाने का ठेका, 20 हजार तक की हो रही वसूली

लखनउऊ में कोविड के मरीजों का घर से शव लाने का कोई सरकारी इंतजाम नहीं।

सरकारी उदासीनता से शव को ले जाने वाले वाहनों के संचालक मनमानी कर रहे हैं। अभी तक ढ़ाई से तीन हजार की मांग करने वाले संचालकों ने घर में श्मशानघाट तक शव पहुंचाने के लिए बीस हजार से तीस हजार तक की मांग कर रहे हैं।

Rafiya NazTue, 20 Apr 2021 06:00 AM (IST)

लखनऊ [अजय श्रीवास्तव]। राजाबाजार के बागमक्का निवासी सेवानिवृत्त बैंक कर्मी अनिल रस्तोगी की शुक्रवार को मौत हो गई। वह कोरोना संक्रमित थे और घर पर ही इलाज चल रहा था लेकिन शव को श्मशान घाट तक कैसे ले पहुंचाया जाए? यह सवाल उनके परिजन अफसरों और हेल्प लाइन पर फोन कर तलाशते रहे लेकिन अधिकांश फोन पर सिर्फ घंटी ही सुनाई दी। इंटरनेट मीडिया पर भी यह मामला गया लेकिन किसी के पास कोई जवाब नहीं था कि आखिर शव को श्मशानघाट पर कैसे पहु़ंचाया जाएगा।

आखिरकार निजी वाहन (लाश के वास्ते) वाले से बात की लेकिन वह तैयार नहीं हुआ। बात बढ़ी तो बीस हजार का किराया मांगा और चार पीपीई किट। कहा, कोविड शव को पहुंचाने का यही रेट है। पूरा ठेका लेते हैं श्मशानघाट तक पहु़ंचाने का।

इस प्रक्रिया में दोपहर एक से शाम पांच बज गए। जब शव गुलाला घाट पहुंचा तो तब यहियागंज पुलिस चौकी और निजी लोगों को फोन मदद करने के लिए आने लगे पहुंचे लेकिन इसके लिए जिम्मेदार सीएमओ की टीम संवेदनहीन बनी रही। मृत अनिल के रिश्तेदार आदित्य रस्तोगी का कहना है कि शव ले जाने के लिए नगर निगम कंट्रोल रूम फोन किया तो वहां से कोविड कंट्रोल रूम का नंबर दिया गया, जहां पर कंट्रोल रूम ऋतु सुहास के बात हुई तो उन्होंने डिटेल भेजने को कहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ डीएम दफ्तर फोन करने पर वहां से दो नंबर दिए गए, जो रिसीव नहीं हो रहे थे। आखिरकार खुद से ही इंतजाम करना पड़ा।

इस त्रासदी को अनिल का परिवार भूल नहीं पा रहा है। यह दर्द सिर्फ उनका ही नहीं, शहर में तमाम लोग इस पीढ़ा को झेल रहे हैं,जिनके यहां कोई कोविड संक्रमित है और घर पर ही मौत हो जा रही है लेकिन शव आने का कोई इंतजाम नहीं है।

केस नंबर एक- ठाकुरगंज निवासी प्रवीन निगम कक्का कोविड संक्रमित थे और रिपोर्ट आने के तीन दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। अब उनका शव कैसे श्मशानघाट ले जाया जाए। इसका कोई इंतजाम नहीं था। जहां फोन किया जाता तो यही जवाब मिलता की निजी वाहन से ले आइए। उच्च प्रभाव से ही सरकारी एंबुलेंस घर पहुंची और इस प्रक्रिया में करीब दो घंटा लग गया।

-विनम्र खंड निवासी सेवानिवृत्त जज रमेश चंद्रा की पत्नी भी कोविड संक्रमित थी और कई घंटे तक कोई एंबुलेंस शव लेने नहीं गई। बहुत दबाव बना तो सरकारी एंबुलेंस उनके यहां गई।

नगर निगम पहुंचे बाइस फोन

कोविड संक्रमण से घर पर हुई मौत के बाद शव को ले जाने के लिए नगर निगम के कंट्रोल रूम पर करीब बाइस फोन पहुंचे और एंबुलेंस भेजने का दबाव बनाने लगे लेकिन इस कंट्रोल रूम पर सैनिटाइजेशन और सफाई की शिकायत दर्ज होती है और कोविड कंट्रोल रूम का नंबर दिया जा रहा था। ऐसे में कई लोगों को खुद के खर्च पर ही शव को श्मशानघाट पहुंचाना पड़ा।

सरकारी उदासीनता से मुनाफाखोर सक्रिय

सरकारी उदासीनता से शव को ले जाने वाले वाहनों के संचालक मनमानी कर रहे हैं। अभी तक ढ़ाई से तीन हजार की मांग करने वाले संचालकों ने घर में कोविड संक्रमण से हुई मौत पर मुनाफा कमा रहे हैं। श्मशानघाट तक शव पहुंचाने के लिए बीस हजार से तीस हजार तक की मांग कर रहे हैं।

शासन में फंसा है मामला

नगर निगम के एक अधिकारी का कहना है कि यह मामला सामने हर दिन आ रहा है कि घर में हुई कोविड संक्रमण से मौत के बाद शव को कैसे श्मशानघाट पहुंचाया जाए। दरअसल रायपुर में यह काम नगर निगम कर रहा है लेकिन वहां पर स्वास्थ्य विभाग नगर निगम के अधीन है, जबकि उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं है और यह काम स्वास्थ्य विभाग को करना चाहिए। मामला शासन स्तर पर चल रहा है और जल्द ही कोई आदेश जारी होगा।

 

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