यूपी में पशु चिकित्सकों को मेडिकल पैरिटी के लिए समिति गठित, शासन के निर्देश पर तैयारी करेगी आख्या

प्रदेश भर के पशु चिकित्सकों को मेडिकल पैरिटी देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। पशुपालन निदेशक डा. एसके मलिक ने कंप्लीट मेडिकल पैरिटी देने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। असल में कंप्लीट मेडिकल पैरिटी की मांग को लेकर पशुचिकित्सक डिजिटल बायकाट करके आंदोलन छेड़े थे।

Vikas MishraFri, 22 Oct 2021 09:58 AM (IST)
संयुक्त निदेशक इपीडिमियोलाजी मुख्यालय की अध्यक्षता में गठित टीम शासन के निर्देश पर आख्या तैयार करेगी।

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। प्रदेश भर के पशु चिकित्सकों को मेडिकल पैरिटी देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। पशुपालन निदेशक डा. एसके मलिक ने कंप्लीट मेडिकल पैरिटी देने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। संयुक्त निदेशक इपीडिमियोलाजी मुख्यालय डा. शरद कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित टीम शासन के निर्देश पर आख्या तैयार करेगी। 

असल में, कंप्लीट मेडिकल पैरिटी की मांग को लेकर पशुचिकित्सक डिजिटल बायकाट करके आंदोलन छेड़े थे। उन्होंने जिलों में बने विभागीय वाट्सएप ग्रुपों का भी बहिष्कार कर दिया था, इससे पशुओं के इलाज में परेशानी हो रही थी। कई जिलों के मुख्य पशुचिकित्साधिकारियों ने निदेशालय को पत्र लिखकर चिकित्सकों के आंदोलन से समस्या होने का उल्लेख किया था। आखिरकार इसका संज्ञान लिया गया। समिति में संयुक्त निदेशक डा. विद्याभूषण सिंह, डा. जयकेश कुमार पांडेय, डा. अरविंद कुमार वर्मा व डा. प्रमोद कुमार पवार को सदस्य बनाया गया है। संघ ने शासन से संवर्ग की विभागीय पदोन्नति भी समयबद्ध तरीके से कराने की मांग पर भी कार्यवाही करने की मांग की, जिससे विभाग में सैकड़ों रिक्त पदों पर पूर्णकालिक अधिकारियों की तैनाती हो सके और कामचलाऊ तरीके पर रोक लग सके। 

ज्ञात हो कि विभाग में निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों के 300 से ज्यादा समेत पद डीपीसी न होने से पिछले चार वर्षों से खाली चल रहे हैं। उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ अध्यक्ष डा. राकेश कुमार ने बताया कि 218 अस्पताल बिना पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों के पद सृजित किये ही खोल दिये गए हैं, 250 पद पशु चिकित्सा अधिकारियों के पद रिक्त हैं। विभाग की स्थिति भयावह है साथ ही सभी निराश्रित पशु आश्रय स्थलों के लिए भी पशुचिकित्सकों की भारी कमी है, जिससे एक एक पशु चिकित्सक के पास 25 निराश्रित पशु स्थल तक की निगरानी का जिम्मा है, जो कि किसी भी तरह से प्रतिदिन संभव नहीं है और पूरी तरह अव्यावहारिक भी है। जालौन जिले में ही अकेले 300 निराश्रित पशु स्थल संचालित हैं, जबकि वहां केवल 16 पशुचिकित्सकों की तैनाती है। संघ ने मुख्यमंत्री से निराश्रित पशुओं से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए व्यावहारिक ठोस कदम उठाने की मांग की है।

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