UP के सभी जिलों में स्वतंत्रता दिवस से फ्री वाईफाई, सीएम योगी आद‍ित्‍यनाथ ने हाटस्पाट चिन्हित करने के द‍िए न‍िर्देश

भाजपा के संकल्प पत्र में भी मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने का उल्लेख था। प्रदेश में जब योगी सरकार बनी तो लखनऊ सहित राज्य के कई शहरों के प्रमुख स्थलों पर मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।

Anurag GuptaSat, 24 Jul 2021 10:30 PM (IST)
17 नगर निगमों सहित सभी बड़े शहरों को योजना में किया शामिल।

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। प्रदेश सरकार 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सभी शहरों में फ्री वाईफाई की सुविधा देने जा रही है। इसमें 17 नगर निगमों के साथ ही सभी 75 जिला मुख्यालय शामिल रहेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर विकास विभाग मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने की मुहिम में जुट गया है। नगर विकास विभाग ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और नगर आयुक्तों को भेजे निर्देश में कहा है कि सभी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हाटस्पाट चिन्हित किए जाएं। विभाग 15 अगस्त से हर शहर के बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन के समीप के स्थलों, तहसील, कचहरी, ब्लाक कार्यालय, रजिस्ट्रार कार्यालय तथा मुख्य बाजारों में मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।

भाजपा के संकल्प पत्र में भी मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराने का उल्लेख था। प्रदेश में जब योगी सरकार बनी तो लखनऊ सहित राज्य के कई शहरों के प्रमुख स्थलों पर मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री ने इस योजना को सभी जिला मुख्यालयों, नगर पालिका परिषदों तथा 17 नगर निगमों के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर शुरू करने का फैसला किया है। नगर विकास विभाग ने जो योजना तैयार की है, उसके अनुसार बड़े शहरों में दो स्थानों पर और छोटे शहरों में एक स्थान पर मुफ्त वाईफाई की सुविधा दी जाएगी। ऐसे में लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मेरठ, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृंदावन और फीरोजाबाद नगर निगम वाले शहरों के अलावा नगर पालिका परिषद के शहरों में भी यह सुविधा दी जाएगी।

इसके लिए नगरीय निकाय इंटरनेट कंपनियों से करार करेंगे। वाईफाई में इंटरनेट की स्पीड पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। नगर आयुक्तों व अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना या नगरीय निकाय अपने स्रोत से इसका खर्च उठाएंगे। निकायों से यह भी कहा गया है कि सुविधा देने की जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। सरकार का मानना है कि इस सुविधा से लोग अपनी जरूरतों के आधार पर किसी भी स्थान पर बैठकर अपना काम कर सकेंगे। 

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