केंद्र ने यूपी सरकार से पूछा-कितनी अवधि तक स्कूल से ड्राप आउट रहे बच्चे, धर्म की भी मांगी जानकारी

केंद्र ने यूपी सरकार से कहा है कि वह स्कूलों में नामांकित किये गए ड्राप आउट बच्चों के बारे में यह भी बताए कि वह कितनी अवधि के लिए ड्राप आउट रहे हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे बच्चों के धर्म के बारे में भी जानकारी मांगी है।

Vikas MishraWed, 23 Jun 2021 10:33 PM (IST)
केंद्र ने यूपी सरकार से कहा है कि स्कूलों में नामांकित किये गए ड्राप आउट बच्चों के बारे में बताए।

लखनऊ, (राज्य ब्यूरो)। केंद्र ने राज्य सरकार से कहा है कि वह स्कूलों में नामांकित किये गए ड्राप आउट बच्चों के बारे में यह भी बताए कि वह कितनी अवधि के लिए ड्राप आउट रहे हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे बच्चों के धर्म के बारे में भी जानकारी मांगी है। जिन बच्चों के माता और पिता दोनों नहीं है, उनके अभिभावक के नाम के साथ उनके मोबाइल नंबर के बारे में भी सूचना मांगी है। केंद्र सरकार की ओर से यह ब्योरा मांगे जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग शैक्षिक सत्र 2020-21 में नामांकित किये गए आउट आफ स्कूल बच्चों का सत्यापन कराकर यह जानकारी हासिल करने में जुटा है। 

निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत छह से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को निश्शुल्क प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने का अधिकार है। स्कूली शिक्षा के दायरे से छूटे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए राज्य सरकार 'स्कूल हर दिन आयेंÓ (शारदा) अभियान संचालित कर रही है। अभियान के तहत पांच साल से अधिक उम्र से लेकर 14 साल तक के ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनका नामांकन आयुसंगत कक्षा में कराया जाता है, जिनका नाम किसी स्कूल में नहीं लिखा है या नामांकन के बाद वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर सके हैं। राज्य सरकार ने छह से 14 वर्ष तक के उन बच्चों को आउट आफ स्कूल (बिना विद्यालय का) माना है, जिनका नाम किसी प्रारंभिक विद्यालय में कभी लिखा न गया हो या नामांकन के बाद वे अपनी अनुपस्थिति की पूर्व सूचना दिए बिना लगातार 45 दिन या उससे ज्यादा अवधि के लिए स्कूल में अनुपस्थित रहे हों। 

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार का शिक्षा मंत्रालय भी शारदा पोर्टल विकसित कर रहा है, जिसके लिए उसने यह अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं। शारदा अभियान के तहत शैक्षिक सत्र 2020-21 में प्रदेश में लगभग 5.5 लाख बच्चे चिन्हित किये गए थे, जिनमें से 5.29 लाख बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराया गया था। केंद्र की ओर से जानकारी मांगे जाने के बाद अब तक 13,991 बच्चों का ही सत्यापन कराया जा सका है।

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