तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद केडी सिंह पर गंभीर आरोप, CBI ने लखनऊ में दर्ज किया केस

निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने का मामला।

केडी सिंह व अन्य पर कानपुर के कई निवेशकों के करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। कानपुर के चकेरी निवासी पवन मिश्रा ने वर्ष 2019 में कोतवाली नगर में केडी सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कराया था।

Anurag GuptaMon, 12 Apr 2021 06:30 AM (IST)

लखनऊ, जेएनएन। सीबीआइ ने करोड़ों रुपये की धांधली के मामले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद केडी सिंह समेत सात लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू की है। यह केस सीबीआइ लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने दर्ज किया है।  सीबीआइ ने आरोपित केडी सिंह की एल केमिस्ट टाउनशिप इंडिया लिमिटेट व एल केमिस्ट होल्डिंग्स लिमिटेड कंपनियों के जरिए निवेशकों को प्लाट, विला व फ्लैट देने का दावा कर उनकी गाढ़ी कमाई हड़प ली थी। सीबीआइ ने कानपुर नगर में सितंबर 2019 में दर्ज कराई गई एफआइआर को अपने केस का आधार बनाया है।

यह मुकदमा कानपुर की नगर कोतवाली में दर्ज कराया गया था, जिसमें पूर्व सांसद केडी सिंह समेत सात नामजद आरोपित थे। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले की जांच कर रहा है। ईडी पूर्व में अारोपितों की करीब 239 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी जब्त कर चुका था। जब्त की गई संपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के कुफरी स्थित रिसॉर्ट तथा पंजाब व हरियाणा की कई संपत्तियां शामिल हैं। ईडी के यह कार्रवाई सेबी के आदेश पर की थी।

केडी सिंह व अन्य पर कानपुर के कई निवेशकों के करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। कानपुर के चकेरी निवासी पवन मिश्रा ने वर्ष 2019 में कोतवाली नगर में केडी सिंह समेत सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे में केडी सिंह के अलावा उनकी कंपनियों के निदेशक सतेंद्र सिंह, सुचेता खेमका, जय श्री प्रकाश सिंह, बृजमोहन महाजन, छत्रसाल सिंह, नरेंद्र सिंह रानावत व नंदकिशोर सिंह को आरोपित बनाया गया था। कुछ दिनों तक स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच की थी, जिसके बाद यह मामला शासन ने ईओडब्लयू के हवाले कर दिया था।

दिनों इस मामले की सीबीआइ जांच कराने की सिफारिश की गई थी। निवेशकों का आरोप है कि पूर्व सांसद केडी सिंह की कंपनियों ने वर्ष 2010 में प्लाट व मकान देने अथवा 18 फीसद ब्याज के साथ उनकी रकम लौटाने का वादा किया था और बाद में निवेशकोें की रकम डूब गई थी। योजना में विभिन्न राज्यों में 15 लाख से अधिक निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी।

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