पीएम मोदी के गोरखपुर आगमन से पहले बसपा की कार्रवाई, विधायक विनय शंकर तिवारी भाई सहित पार्टी से निष्कासित

PM Modi Gorakhpur visit today बहुजन समाज पार्टी ने चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी उनके भाई संत कबीर नगर पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय को निष्कासित कर दिया है। इनके खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई की है।

Dharmendra PandeyTue, 07 Dec 2021 09:00 AM (IST)
बसपा विधायक पंडित हरिशंकर तिवारी के पुत्र विनय शंकर तिवारी,

लखनऊ, जेएनएन। PM Modi Gorakhpur visit today पूर्वी उत्तर प्रदेश विशेषकर गोरखपुर की राजनीति के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले पंडित हरिशंकर तिवारी के परिवार को बहुजन समाज पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन से पहले बड़ा झटका दिया है। पीएम मोदी के मंगलवार को गोरखपुर आने से पहले बसपा ने पंडित हरिशंकर तिवारी के विधायक पुत्र विनय शंकर तिवारी, पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी उर्फ कुशल तिवारी तथा भांजे पूर्व विधान परिषद अध्यक्ष गणेश शंकर पाण्डेय को पार्टी से बाहर कर दिया है।

बहुजन समाज पार्टी के गोरखपुर के मुख्य सेक्टर प्रभारी सुधीर कुमार भारती ने इनके खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई की है। बहुजन समाज पार्टी ने चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी, उनके भाई संत कबीर नगर पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय को निष्कासित कर दिया है। बसपा के मुख्य सेक्टर प्रभारी गोरखपुर मंडल सुधीर कुमारी भारती की तरफ से जारी निष्कासन पत्र में तीनों भाइयों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है। सुधीर भारती ने बताया कि विगत कुछ दिनों से यह लोग पार्टी के किसी कार्यक्रम में न तो रुचि ले रहे थे न ही सम्मिलित हुए।

गोरखपुर मे अब तिवारी परिवार का नया सियासी दांव क्या होगा, इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह परिवार तकरीबन डेढ़ दशक से पूर्वांचल में बहुजन समाज पार्टी का झंडा थाम कर ब्राह्मण-दलित गठजोड़ को मजबूत कर रहा था। पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में मोदी-योगी की प्रचंड लहर के बावजूद गोरखपुर की चिल्लूपार सीट पर भाजपा प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी को हराकर बसपा को जीत दिलाई थी। विनय शंकर तिवारी गोरखपुर जिले के इकलौते गैर भाजपाई विधायक हैं।

विनय शंकर तिवारी अपने पिता की परंपरागत सीट पर जीतने से 2012 के विधानसभा चुनाव में बांसी से, 2009 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर और 2008 के उपचुनाव में बलिया से भी हाथ आजमा चुके हैं। विनय शंकर के अलावा निष्कासन सूची में शामिल गणेश शंकर पांडेय बसपा सरकार में ही विधान परिषद के पूर्व सभापति रह चुके हैं। 2007 में बसपा सरकार के दौरान दलित ब्राह्मण गठजोड़ में सतीश मिश्रा के बाद गणेश शंकर पांडेय की भूमिका दूसरे नंबर पर मानी जाती थी।

गोरखपुर और महाराजगंज से चार बार विधान परिषद सदस्य रह चुके गणेश शंकर पांडेय 2010 में विधान परिषद के सभापति चुने गए। पिछले दिनों हुए पंचायत चुनाव में उनकी बहू महराजगंज के लक्ष्मीपुर से ब्लाक प्रमुख चुनी गई हैं। विनय शंकर के बड़े भाई भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी बसपा के टिकट पर ही दो बार सांसद रह चुके हैं। एक बार 2007 के उप चुनाव जबकि दूसरी बार 2009 के लोकसभा चुनाव में खलीलाबाद लोकसभा सीट से वह सांसद रहे हैं। इसके बाद 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में वह खलीलाबाद से ही बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं मिल सकी। बहुजन समाज पार्टी से निष्कासन के संबंध में पक्ष लेने के लिए विधायक विनय शंकर तिवारी सहित अन्य दोनों से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन किसी से भी बात नहीं हो सकी।  

माना जा रहा है कि तिवारी बंधुओं के साथ गणेश शंकर पाण्डेय के समाजवादी पार्टी में जाने की आहट से ही बसपा ने यह कार्रवाई की है। हालांकि इससे बसपा को पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी नुकसान भी होने की संभावना है। यह परिवार ब्राह्मणों का मजबूत वोट बैंक है। विनय शंकर के साथ ही कुशल तिवारी और गणेश शंकर पाण्डेय 11 दिसंबर को समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। समाजवादी पार्टी विनय शंकर तिवारी को चल्लूपार विधानसभा चुनाव लड़ाने के साथ ही गणेश शंकर पाण्डेय को विधान परिषद चुनाव और भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को 2024 में संत कबीर नगर से लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है।

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

Tags
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.