यूपी के इस शहर में डीआरडीओ बनाएगा ब्रह्मोस मिसाइल, 2000 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है। ब्रह्मोस का निर्माण उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर के लखनऊ नोड में राजधानी के सरोजनीनगर क्षेत्र में किया जाएगा।

Umesh TiwariSat, 23 Oct 2021 12:27 AM (IST)
डीआरडीओ की ओर से लखनऊ में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है।

लखनऊ [राज्य ब्यूरो]। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर के लखनऊ नोड में राजधानी के सरोजनीनगर क्षेत्र में किया जाएगा। इसके लिए सरोजनीनगर में 80 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर ली गई है। इस परियोजना के 2000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।

योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश रक्षा तथा एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2018 (यथासंशोधित) के प्राविधानों में ढील देते हुए डीआरडीओ ब्रह्मोस, रक्षा मंत्रालय के पक्ष में इस जमीन को निश्शुल्क एक रुपये के टोकन वार्षिक लीज रेंट पर देने का फैसला किया है। इस नीति के तहत डीआरडीओ ब्रह्मोस को भूमि खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत देने के प्रस्ताव को भी मंजूर दी है।

ब्रह्मोस उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कारिडोर के लखनऊ नोड में स्वदेशी तकनीक से विकसित होने वाली उच्च तकनीक की मिसाइल होगी। देश की रक्षा में विदेशी निर्भरता कम करने, स्वदेशी तकनीकी के विकास तथा रक्षा उपकरणों व उससे संबंधित अन्य सामग्रियों की खरीद में कमी लाने के लिए डीआरडीओ ब्रह्मोस-एनजी एयरोस्पेस परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके निर्माण से देश की न केवल सैन्यशक्ति मजबूत होगी बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी बल मिलेगा जिसमें उत्तर प्रदेश की अग्रणी भूमिका होगी।

इस परियोजना के तहत डीआरडीओ की ओर से अगले पांच से सात वर्षों में कुल 9,300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग 500 अभियंताओं व तकनीकी लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार तथा 1500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों की स्थापना के अवसर उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश को विभिन्न करों के रूप में राजस्व की प्राप्ति होगी।

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