सात नए सारथियों के साथ चुनावी पथ पर भाजपा का अंत्योदय रथ, जानें- क्या संदेश दे रहा योगी मंत्रिमंडल का विस्तार

UP Cabinet Expansion उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सात-सात मोहरों की चौदह चाल चलकर अपना चुनावी मोर्चा सजा लिया है। सामाजिक संतुलन साधने का मोदी माडल अपनाते हुए योगी सरकार ने भी सात नए मंत्री बनाकर अंत्योदय का ही संदेश दिया।

Umesh TiwariMon, 27 Sep 2021 06:00 AM (IST)
मंत्रिमंडल विस्तार में यूपी सरकार ने जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने की पूरी कोशिश की है।

लखनऊ [अजय जायसवाल]। जाति के छोटे-छोटे झंडाबरदारों में शह-मात के चल रहे दांवपेच के बीच उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने सात-सात मोहरों की चौदह चाल चलकर अपना चुनावी मोर्चा सजा लिया है। महज ढाई माह पहले सात जुलाई को मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो यूपी के सात सांसदों को उसमें जगह मिली। एक सवर्ण, तीन पिछड़ा वर्ग के और तीन दलित। सामाजिक संतुलन साधने का वही मोदी माडल अपनाते हुए योगी सरकार ने भी पार्टी के पितृ-पुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के ठीक अगले दिन सात नए मंत्री बनाकर 'अंत्योदय' का ही संदेश दिया। फार्मूला बिल्कुल वही- एक सवर्ण, तीन पिछड़े और एक अनुसूचित जनजाति सहित तीन दलित। न सिर्फ जातीय, बल्कि इस बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार में सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन भी साधने की पूरी कोशिश की है।

रविवार को किए गए विस्तार के साथ ही योगी की टीम में कुल 60 सदस्य हो गए हैं। इनमें 24 कैबिनेट, नौ राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 27 राज्यमंत्री हैं। पिछले विस्तार के बाद मंत्रिमंडल में 27 सवर्ण, 21 पिछड़े और सात अनुसूचित जाति के साथ ही एक मुस्लिम मंत्री थे। तीन मंत्रियों के निधन से एक-एक सवर्ण, पिछड़ी व अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व मंत्रिमंडल में घट गया था।

गौर करने की बात यह है कि दूसरे विस्तार में सबका साथ, सबका विकास फार्मूले का ख्याल रखते हुए शामिल किए गए नए चेहरों में तीन अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दो अनुसूचित जाति (एससी) व एक अनुसूचित जनजाति (एसटी) से हैं, जबकि एक ब्राह्मण को मंत्री बनाया गया हैं। अब मंत्रिमंडल में कुल नौ ब्राह्मण मंत्री और मुख्यमंत्री सहित सात क्षत्रिय मंत्री हैं। जानकारों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले भाजपा के इस सियासी दांव से विरोधी पार्टियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ओबीसी व एससी-एसटी में भी यादव व जाटव के बजाय भाजपा ने सामाजिक रूप से अंतिम पायदान पर रहने वाली खटीक, गोंड, बिंद (मल्लाह), प्रजापति (कुम्हार), गंगवार (कुर्मी) जैसी जातियां के विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देकर पंडित दीनदयाल के अंत्योदय सिद्धांत को स्वरूप देने का प्रयास किया है। भाजपा के रणनीतिकारों ने चार एमएलसी नामित करने में भी गुर्जर, भुर्जी व निषाद जैसी जातियों को तवज्जो दी है।

अपना दल को साथ लेकर पहले ही कुर्मी (पटेल) समाज को तरजीह देने के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार व एमएलसी बनाने में भी जातीय समीकरण साध भाजपा ने तकरीबन 40 फीसद वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने का दांव चला है। पहली बार राज्य में भुर्जी समुदाय के नेता को भाजपा ने एमएलसी बनाया है। वहीं, मोदी मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद से सूबे के विभिन्न हिस्से के जो मंत्री हैं उनमें छह सवर्ण, छह पिछड़ा वर्ग और तीन अनुसूचित जाति से हैं।

ये था मोदी माडल

मंत्री : जाति : वर्ग अजय मिश्रा : ब्राह्मण : सवर्ण अनुप्रिया पटेल : कुर्मी : पिछड़ा वर्ग पंकज चौधरी : कुर्मी : पिछड़ा वर्ग बीएल वर्मा : लोध : पिछड़ा वर्ग भानुप्रताप सिंह : कोरी : अनुसूचित जाति एसपी सिंह बघेल : बघेल : अनुसूचित जाति कौशल किशोर : पासी : अनुसूचित जाति

योगी मंत्रिमंडल विस्तार में...

जितिन प्रसाद : ब्राह्मण : सवर्ण धर्मवीर प्रजापति : कुम्हार : पिछड़ा वर्ग छत्रपाल गंगवार : कुर्मी : पिछड़ा वर्ग संगीता बलवंत : बिंद : पिछड़ा वर्ग दिनेश खटीक : खटीक : अनुसूचित जाति पल्टू राम : खटीक : अनुसूचित जाति संजीव कुमार : गोंड : अनुसूचित जनजाति

पूर्वांचल-पश्चिम में संतुलन, तराई-रुहेलखंड का भी प्रतिनिधित्व : मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही एमएलसी बनाने में सोशल इंजीनियरिंग के साथ ही क्षेत्रीय समीकरण का भी भाजपा ने ख्याल रखा है। योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में तीन पूर्वांचल से मंत्री बने हैं, वहीं इसी क्षेत्र से संजय निषाद एमएलसी बनाए गए हैं। इसी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से मंत्रिमंडल में जहां दो को जगह दी गई है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से ही दो एमएलसी भी बनाए गए हैं। एक-एक मंत्री तराई क्षेत्र के शाहजहांपुर व रुहेलखंड के बरेली से बने हैं।

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