Ramlila in Ayodhya: रामलीला से परिभाषित हो रहा सांप्रदायिक सौहार्द, जान‍िए कौन न‍िभा रहा क‍िसका क‍िरदार

बॉलीवुड में करीब चार दशक से रोबीली आवाज और जीवंत अभिनय के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाले रजा मुराद कुंभकर्ण की भूमिका का निर्वहन करेंगे तो चंद्रकांता फेम एक अन्य मशहूर सिने स्टार शाहबाज खान रावण की भूमिका में होंगे।

Anurag GuptaTue, 21 Sep 2021 05:53 PM (IST)
शाहबाज खान रावण, रजा मुराद कुंभकर्ण एवं एवं शीबा खान मंदोदरी की भूमिका में होंगी।

अयोध्‍या, [रघुवरशरण]। सितारों से सज्जित अयोध्या की रामलीला में सांप्रदायिक सौैहार्द परिभाषित हो रहा है। छह से 15 अक्टूबर तक सरयू तट स्थित लक्ष्मण किला परिसर में प्रस्तावित रामलीला में बॉलीवुड के दो दर्जन से अधिक जाने-माने कलाकार भूमिका अदा करेंगे। इनमें से कई मुस्लिम कलाकार भी होंगे। बॉलीवुड में करीब चार दशक से रोबीली आवाज और जीवंत अभिनय के लिए विशिष्ट पहचान रखने वाले रजा मुराद कुंभकर्ण की भूमिका का निर्वहन करेंगे, तो चंद्रकांता फेम एक अन्य मशहूर सिने स्टार शाहबाज खान रावण की भूमिका में होंगे। इन दोनों शीर्ष अभिनेताओं ने गत वर्ष की रामलीला में भी काम किया था। शाहबाज खान तो रावण की ही भूमिका में थे, जबकि रजा मुराद ने अहिरावण की भूमिका निभाई थी।

इस बार उन्हें कहीं अधिक महत्वपूर्ण कुंभकर्ण की भूमिका के लिए चुना गया है। जबकि बॉलीवुड की ही एक अन्य अभिनेत्री शीबा खान मंदोदरी की भूमिका में होंगी। सौहार्द का संदेश महज इन मुस्लिम कलाकारों की भूमिका तक ही नहीं निहित है, बल्कि गत वर्ष की रामलीला से लेकर इस बार की तैयारी के दौरान रामनगरी पहुंचे इन कलाकारों ने पूरे दिल से सौहार्द का राग छेड़ा और श्रीराम के साथ रामनगरी के प्रति पूरी आस्था अर्पित की। दरअसल, यह रुझान रामनगरी की परंपरा के अनुरूप है। सांप्रदायिक एकता एवं साझी विरासत रामनगरी के डीएनए में है। रामनगरी सनातनियों के साथ अनेक मतावलंबियों की आस्था के केंद्र में रही है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से पांच का जन्म अयोध्या में ही हुआ। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महान द्रष्टा गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सर्वाधिक समय रामनगरी में बिताया।

यहां उन्होंने 16 बरसात की ऋतुओं में वास किया और इसी भूमि पर बैठ कर अनेक कालजयी उपदेश दिए। कालांतर में सूफी संतों ने भी रामनगरी की ओर रुख किया और यहां की आबोहवा में ऊपर वाले को जी भर कर याद किया। यहां अनेक शीर्ष सूफी संतों के साथ दूसरे पैगंबर माने जाने वाले हजरत शीश की मजार भी है। सिख गुरु भी रामनगरी की सांस्कृतिक विविधता में चार चांद लगाते हैं। प्रथम गुरु नानकदेव, नवम गुरु तेगबहादुर एवं दशम गुरु गोवि‍ंद सि‍ंह भी समय-समय पर यहां की पवित्र रज शिरोधार्य करने आए, जिन वैष्ण्णव मतावलंबियों से रामनगरी की मौजूदा पहचान गत कई शताब्दियों से प्रवाहमान है, उसकी दो प्रमुख उपधाराएं- रामानुजीय एवं रामानंदीय परंपरा के संत और मंदिर भी अनेकता में एकता एवं एकता में अनेकता के मनोहारी पर्याय हैं।

दुनिया को एकसूत्र में पिराने को तैयार हो रही रामनगरी : रामनगरी में सिख गुरुओं के आगमन की धरोहर संजोने वाले गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड के मुख्यग्रंथी ज्ञानी गुरुजीत सि‍ंह के अनुसार विविधता रामनगरी के अध्यात्म की आत्मा है और यह आत्मा बॉलीवुड के सितारों से सज्जित रामलीला से भी अभिव्यक्त हो रही है। इससे यह विश्वास भी पैदा होता है कि भांति-भांति का अलगाव जब दुनिया में तनाव और हि‍ंसा का सबब बन रहा है, तो रामनगरी अपनी विरासत के अनुरूप दुनिया को एकसूत्र में निरूपित करने को तैयार हो रही है।

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