Ayodhya case: अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस मामले में आरोपित विजय बहादुर का बयान दर्ज

Ayodhya case: अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस मामले में आरोपित विजय बहादुर का बयान दर्ज
Publish Date:Thu, 04 Jun 2020 07:33 AM (IST) Author: Anurag Gupta

लखनऊ, जेएनएन। अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस मामले में गुरुवार को आरोपी विजय बहादुर के बयान सीबीआई अयोध्या प्रकरण के विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव की अदालत में दर्ज किए गए हैं। आरोपी ने अपने बयान में कहा कि ये मामला राजनीति से प्रेरित होने की वजह से उनको फर्जी तरीके से में फंसाया जा रहा है। अदालत ने अन्य आरोपियों के बयान दर्ज करने के लिए पांच जून की अगली तारीख नियत की है।

न्यायालय खुलने के बाद गुरुवार को करीब 11:30 बजे आरोपित विनय कटियार, पवन पांडेय, रामविलास वेदांती, विजय बहादुर यादव, गांधी यादव और संतोष दुबे ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। कल्याण सिंह, साध्वी ऋतंभरा, उमा भारती, ब्रजभूषणशरण सिंह, सलिल प्रधान, चंपतराय, महंत नृत्यगोपाल दास, सक्षी महाराज, एवं आरएन श्रीवास्तव सहित 26 आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने उनकी हाजिरी माफी की प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। जिसको अदालत ने आज के लिए स्वीकार कर लिया।

बयान दर्ज किए जाने के लिए अदालत ने आरोपितों सेे पूछे जाने वाले एक हजार से अधिक प्रश्न पहले से ही तैयार किए हुए हैं। देर शाम तक चली अदालती कार्यवाही में आरोपित विजय बहादुर सिंह ने अदालत में पूछे गए अधिकांश प्रश्नों के जवाब में कहा कि मामला राजनीति से प्रेरित है। उन्हें इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया जा रहा है। आरोपित से जब घटना के विषय और एक आडियो कैसेट के विषय पूछा गया तो उसने बताया कि ये कैसेट तोड़मरोड़ कर बनाया गया है। प्रस्तुत फोटोग्राफ की नेगेटिव पत्रावली में उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसको साक्ष्य में पढ़ा जाएगा।

अभियोजन की ओर से अदालत में सीबीआई के विशेष अधिवक्ता ललित कुमार सिंह, पूर्णेंद्रू चक्रवर्ती और आरके यादव मौजूद रहे। विजय बहादुर सिंह के अधिवक्ता केके मिश्रा भी मौजूद रहे। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि धारा 313 के तहत प्रश्नों की संख्या अधिक होने की दशा में समय शेष नहीं रहा है। इस वजह से सभी गवाहोें के बयान अंकित नहीं किए जा सके हैं। अदालत ने अन्य गवाहों के बयान के लिए पांच जून की तिथि नियत की है। आदेश दिया है कि अगर बयानों के बाद आरोपित अपने साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहेंगे तो वे लिखित बयान के रूप में दर्ज करा देंगे ताकि मुकदमे की कार्यवाही पूरी की जा सके।

इनकी हो चुकी है मौत

वहीं अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णु हरि डालमिया, मोरेश्वर सावें, महंत अवैद्यनाथ, महामंडलेश्वर जगदीश मुनि महाराज, वैकुंठ लाल शर्मा, परमहंस रामचंद्र दास, डॉ. सतीश नागर, बालासाहेब ठाकरे, तत्कालीन एसएसपी डीबी राय, रमेश प्रताप सिंह, महत्यागी हरगोविंद सिंह, लक्ष्मी नारायण दास, राम नारायण दास एवं विनोद कुमार बंसल की मृत्यु हो चुकी है। उच्च न्यायालय के निर्देश पर विशेष अदालत में प्रतिदिन सुनवाई की जा रही है। आगामी 31 अगस्त को निर्णय सुनाया जाना है। न्यायालय पत्रावली के अनुसार इस मामले में छह दिसंबर 1992 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीआइ में विवेचना के उपरांत 48 लोगों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था। 

अयोध्‍या विवादित ढांचा प्रकरण एक नजर में 

1528: अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर मस्जिद का निर्माण किया गया था, जो भगवान राम का जन्मस्थान था। मुगल सम्राट बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इसलिए, बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था। 1853: हिंदुओं का आरोप है कि भगवान राम के मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ। इस मुद्दे पर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पहली हिंसा हुई। 1885: मामला पहली बार अदालत में पहुंचा। महंत रघुवरदास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे राममंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए अपील दायर की। 23 दिसंबर 1949: करीब 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति रख दी। इसके बाद उस स्थान पर हिंदू नियमित रूप से पूजा करने लगे। मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया। 17 दिसंबर 1959: निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए मुकदमा दायर किया। 18 दिसंबर 1961: उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित स्थल के मालिकाना हक के लिए मुकदमा। 1984: विश्र्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने विवादित स्थल का ताला खोलने और एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया। एक समिति का गठन किया गया। 01 फरवरी 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दी। ताला दोबारा खोला गया। नाराज मुस्लिमों ने विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया। 01 जुलाई 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवां मुकदमा दाखिल किया गया। 09 नवंबर 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने विवादित स्थल के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी। 06 दिसंबर 1992: हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा ढहा दिया, जिसके बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे हुए। जल्दबाजी में एक अस्थायी राममंदिर बनाया गया। प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा किया। 2002 अप्रैल: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की। 2005 जुलाई: आतंकवादियों ने विस्फोटक से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया। 30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी। 28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया। 9 मई 2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। जुलाई 2016: बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन। 21 मार्च 2017: रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि अगर दोनों पक्ष राजी हों तो वह कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं। 19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।

 

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