सुप्रीम कोर्ट का उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग में फर्जी टेंडर दिलाने के आरोपितों को जमानत देने से इन्कार

Supreme Court यूपी के पशुपालन विभाग में 292 करोड़ रुपए का टेंडर दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश के व्यापारी से नौ करोड़ रुपए एठने वालों को देश की शीर्ष कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपितों को अंतरिम जमानत भी देने से इन्कार कर दिया।

Dharmendra PandeyThu, 16 Sep 2021 05:03 PM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित टेंडर घोटाले के आरोपितों को अंतरिम जमानत

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में पशु पालन विभाग में यूपी के पशुपालन विभाग में 292 करोड़ रुपए का टेंडर दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश के व्यापारी से नौ करोड़ रुपए एठने वालों को देश की शीर्ष कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित टेंडर घोटाले के आरोपितों को अंतरिम जमानत भी देने से इन्कार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर व्यापारी से 9 करोड़ रुपया वसूलने का फर्जी टेंडर दिलाने वाले आरोपियों को अंतरिम जमानत भी देने से इन्कार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित अनिल राय, रूपक राय, संतोष मिश्रा को अंतरिम जमानत भी नहीं दी है। इनकी जमानत याचिका खारिज कर कोर्ट ने कहा कि इन तीनों आरोपियों पर गंभीर आरोप है। जांच हो रही है। ऐसे में इनको अंतरिम जमानत देना सही नहीं है।

इससे पहले नौ सितंबर को इसी प्रकरण की सुनवाई को कोर्ट ने एक हफ्ते के लिए टाल दिया था। कोर्ट ने रूपक राय के वकील से उसकी अंतरिम जमानत की याचिका की कॉपी उत्तर प्रदेश सकार को देने का निर्देश दिया था। सरकार की तरफ से पेश वकील गरिमा प्रसाद ने बताया कि याचिका की कॉपी नहीं मिलने की वजह से जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। इसी मामले में दो अन्य आरोपियों ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में टेंडर दिलाने के नाम पर मध्य प्रदेश के इंदौर के निवासी व्यापारी मनजीत भाटिया से इन तीनों ने फर्जीवाड़ा किया था। इसके बाद निलंबित सिपाही दिलबहार यादव ने मनजीत भाटिया से नौ करोड़ 27 लाख रुपये की रकम ठगी थी। इसके बाद निलंबित सिपाही ने पीडि़त व्यापारी को अन्य सिपाहियों के साथ मिलकर नाका कोतवाली में जान से मारनेकी भी धमकी दी थी। इससे भयभीत पीडि़त ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जब कार्रवाई शुरू की तो सिपाही दिलबहार यादव भाग निकला। उसके ऊपर पुलिस ने बाद में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। दिलबहार के आत्मसमर्पण करने के बाद इस मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई। एसटीएफ ने सात लोगों को पकड़कर जेल भेजा। जिसके बाद आरोपितों ने लखनऊ में जिला कोर्ट के बाद हाई कोर्ट ने राहत मांगी। जब कहीं से जमानत नहीं मिली तो आरोपितों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। जहां से भी इनको आज झटका लगा।

लखनऊ में पशुपालन विभाग में 292 करोड़ का फर्जी टेंडर दिलाने के लिए नौ करोड़ 72 लाख रुपए हड़पने वाले मामले में इससे पहले मंत्री के प्रधान सचिव समेत दस जालसाजों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। करीब छह महीने चली जांच के बाद इस मामले में 10 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई। विवेचना में यह पाया गया कि इस बड़े फर्जीवाड़ा में सचिवालय के कमरों से लेकर सरकारी गाडिय़ों और अफसर की कुर्सी का इस्तेमाल किया गया। करोड़ों के इस घोटाले में एसटीएफ ने नौ लोगों को जेल भेजा था। इस पूरे फर्जीवाड़े में पशुधन राज्य मंत्री के प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित, सचिवालय के संविदा कर्मी और मंत्री का निजी सचिव धीरज कुमार देव, कथित पत्रकार एके राजीव, अनिल राय और खुद को पशुधन विभाग का उपनिदेशक बताने वाला आशीष राय शामिल थे। मुख्य साजिशकर्ता आशीष राय ही पशुपालन विभाग के उपनिदेशक एसके मित्तल का कार्यालय का इस्तेमाल करके खुद उपनिदेशक बना था। पत्रकार अनिल राय, एक के राजीव मुख्य साजिश कर्ता आशीष राय, मंत्री के निजी रजनीश दीक्षित और होम गार्ड रघुवीर प्रसाद सहित 10 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कि गई है।

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