Anant Chaturdashi 2021: मंगल बुधादित्य योग से होगी सभी मनोकामनाएं पूरी, जान‍िए मुहूर्त और पूजा व‍िध‍ि

Anant Chaturdashi 2021 आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे।

Anurag GuptaSat, 18 Sep 2021 05:28 PM (IST)
Anant Chaturdashi 2021: अनंत चतुर्दशी रविवार को इस बार विशेष मंगल बुधादित्य योग बन रहा है।

लखनऊ, [जितेंद्र उपाध्याय]। भादों मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का यह व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि का मान रविवार को सुबह 5:59 से शुरू होकर 20 सितंबर सुबह 5:28 तक रहेगा। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि अनंत चतुर्दशी रविवार को इस बार विशेष मंगल बुधादित्य योग बन रहा है। सूर्य, बुध व मंगल कन्या राशि में रहेंगे। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। अनंत चतुर्दशी पर शुभ मुहूर्त में पूजा करने से हर प्रकार की परेशानी और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलेगी।

इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने और अनंत सूत्र पीला धागा को बांधने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं। आचार्य कृष्ण कुमार मिश्रा ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने सृष्टि की शुरुआत में चौदह लोकों तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी एवं इन लोकों की रक्षा और पालन के लिए भगवान विष्णु स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हो गए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। इसलिए आज के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूपों की पूजा की जाती है।

आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि महाभारत काल से अनंत चतुर्दशी व्रत की शुरुआत हुई। अनंत भगवान ने सृष्टि के आरंभ में चौदह लोकों की रचना की थी। इन लोकों का पालन और रक्षा करने के लिए वह स्वयं भी चौदह रूपों में प्रकट हुए थे, जिससे वे अनंत प्रतीत होने लगे। आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि अनंत चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और अनंत फल देने वाला माना गया है। इस दिन व्रत रखने और श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करने से समस्त मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा और संतान आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।

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