देश के सभी छावनी क्षेत्रों में अब शिक्षण संस्थानों को लीज पर जमीन लेना आसान, तैयार हो रही नई पाॅलिसी

लखनऊ सहित देश भर की छावनियों में सैन्य इलाकों के आवासीय बंगलों और गिरजाघरों व अन्य धार्मिक स्थलों में शिक्षण संस्थान चल रहे हैं। जहां हजारों बच्‍चे पढ़ते हैं। इनमें कई शिक्षण संस्थानों की जमीन की लीज समाप्त हो चुकी हैं।

Mahendra PandeyMon, 21 Jun 2021 09:36 AM (IST)
शिक्षण संस्थानों को नए सिरे से लीज पर जमीन देने की तैयारी

लखनऊ, [ निशांत यादव ]। छावनी क्षेत्र के सैन्य व असैन्य इलाकों में चल रहे शिक्षण संस्थानों को रक्षा मंत्रालय की भूमि लीज पर लेना अब आसान होगा। रक्षा मंत्रालय ऐसे शिक्षण संस्थानों को नए सिरे से लीज पर जमीन देने की तैयारी कर रहा है जो संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट के तहत आते हों। महानिदेशालय रक्षा संपदा की ओर से सभी कमान के प्रधान निदेशालय रक्षा संपदा को नई पॉलिसी का ड्राफ्ट भेजा गया है। इस ड्राफ्ट पर छावनी परिषद अधिकारियों (सीईओ) और रक्षा संपदा अधिकारियों (डीईओ) से सुझाव भी मांगे गए हैं।

दरअसल लखनऊ सहित देश भर की छावनियों में सैन्य इलाकों के आवासीय बंगलों और गिरजाघरों व अन्य धार्मिक स्थलों में शिक्षण संस्थान चल रहे हैं। जहां हजारों बच्‍चे पढ़ते हैं। इनमें कई शिक्षण संस्थानों की जमीन की लीज समाप्त हो चुकी हैं। साथ ही उनको अतिरिक्त कमरों के निर्माण जैसे काम कराने की अनुमति नहीं मिल पाती है। ऐसे में रक्षा मंत्रालय ने पहले से चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत चल रहे शिक्षण संस्थानों को नए सिरे से जमीन लीज पर देने की पहल की है। जिससे इन शिक्षण संस्थानों के भविष्य को लेकर अक्सर मंडरा रहे संकट को टाला जा सके। प्रस्तावित पॉलिसी के तहत केवल चैरिटेबल ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाले शिक्षण संस्थानों को ही छावनी के भीतर 30 साल के लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। इनका दो बार 30-30 साल तक के लिए नवीनीकरण किया जाएगा। जो कि अधिकतम 90 वर्ष के लिए होगा।

वहीं जहां सामान्य शिक्षण संस्थानों के लिए लीज रेंट एसटीआर (स्टैंडर्ड टेबल ऑफ रेंट) के आकलन के मुताबिक भूमि की कीमत का 2.5 प्रतिशत होता है। चैरिटेबल ट्रस्ट संचालित शिक्षण संस्थानों के लिए यह 1.5 प्रतिशत होगी। हर तीस साल में लीज रेंट में बदलाव किया जाएगा। वहीं लीज को फ्री होल्ड कराने के लिए चेंज ऑफ परपज के तहत भूमि की लागत का 10 प्रतिशत पेनाल्टी देनी होगी। असैन्य इलाकों में भी चल रहे स्कूलों को फ्री होल्ड कराया जा सकेगा। वहीं लीज की मंजूरी देने के लिए दो तरह की कमेटी बनेगी। असैन्य इलाकों में निदेशक रक्षा संपदा और सैन्य क्षेत्र में लीज के आवेदन की संस्तुति से पहले स्टेशन कमांडर के नेतृत्व में कमेटी भौतिक सत्यापन करेगी।

10 प्रतिशत सीट आरक्षित

नई पॉलिसी में सेना के जवानों, अधिकारियों व जेसीओ के अलावा रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के बच्‍चों के प्रवेश के लिए 10 प्रतिशत सीट आरक्षित करने का भी प्राविधान होगा।

देश भर की छावनियों में चल रहे शिक्षण संस्थानों को नई पॉलिसी बड़ी राहत देगी। वह लीज पर जमीन ले सकेंगे। साथ ही उनको अपनी क्षमता का विस्तार करने में भी अब आसानी होगी। छावनी में बेहतर शिक्षण संस्थानों से यहां गुणवत्तापरक शिक्षा भी मिलेगी।

-अमित कुमार मिश्र, एडीजी भूमि, रक्षा संपदा महानिदेशालय

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