यूपी में प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए आए 43 आवेदन, बेरोजगारों को मिला मौका; जानिए कैसे होगा Apply

यूपी में अभी तक परिवहन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त गैराज एनजीओ ट्रस्ट रोडवेज आदि संस्थाओं को ही प्रदूषण जांच केंद्र मिल पाता था। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विभाग ने इस बार आमजनों को भी केंद्र देने का निर्णय लिया।

Rafiya NazSun, 25 Jul 2021 08:30 AM (IST)
मोबाइल वैन प्रदूषण जांच केंद्र में नहीं दिखी लोगों की दिलचस्पी।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के लिए शुरू किए गए परिवहन विभाग के प्रयास रंग लाने लगे हैं। बेरोजगारों को प्रदूषण जांच केंद्र लेने के लिए पहली बार परिवहन विभाग द्वारा दिए गए मौके पर 43 बेरोजगारों ने प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवेदन किया है। इनमें लखनऊ में तीन लोगों ने नया केंद्र खोलने के लिए आवेदन किया है।

अभी तक परिवहन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त गैराज, एनजीओ, ट्रस्ट, रोडवेज आदि संस्थाओं को ही प्रदूषण जांच केंद्र मिल पाता था। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए विभाग ने इस बार आमजनों को भी केंद्र देने का निर्णय लिया। मंशा है कि इससे न केवल प्रदेश के हर कोने में गाडिय़ों के प्रदूषण की जांच हो सकेगी साथ ही पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 'जागरणÓ ने जनवरी में इस रोजगारपरक खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। लाकडाउन हटते ही इस योजना में लोगों ने दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी।

फीस

प्रदूषण जांच केंद्र खोलने के लिए 5000 रुपये प्रति केंद्र विभाग में जमा करना होगा। डीजल और पेट्रोल दोनों के प्रदूषण जांच केंद्र के लिए दस हजार रुपये ऑनलाइन जमा करना होगा। प्रदूषण जांच केंद्र के प्राधिकार की वैधता तीन साल की होगी। उसके बाद केंद्र चलाने वाले को नवीनीकरण कराना होगा। इसके लिए उसे पांच हजार रुपये प्रति केंद्र के हिसाब से फीस जमा करनी होगी। नवीनीकरण के लिए आवेदन पत्र तय फीस के साथ समाप्त हो रही तिथि से 45 दिन पहले करना होगा।

प्रदूषण जांच का शुल्क :

पेट्रोल चलित दोपहिया वाहन-50 रुपये तिपहिया पेट्रोल, सीएनजी व एलपीजी गाड़ी-70 रुपये चार पहिया वाहन, पेट्रोल, सीएनजी, एलपीजी-70 रुपये ट्रक व अन्य डीजल वाहन-100 रुपये

मशीनों की कीमत: दोनों मशीनों की कीमत (डीजल और पेट्रोल) करीब तीन लाख रुपये।

एआरटीओ मुख्यालय कमल जोशी ने बताया कि लोगों ने प्रदूषण जांच केंद्र खोले जाने में अपनी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। प्रदेश में 43 लोगों ने आवेदन किया है। परिवहन आयुक्त के निर्देश पर पोर्टल अपग्रेड कर व्यवस्था को गति दे दी गई है। पूरी योजना ऑनलाइन है।

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