लखनऊ के द्वादश मंदिर में होते हैं 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन, शिवार्चन और रुद्राभिषेक का जल होता है रिचार्ज, जानें यहां की खासियत

रुद्राभिषेक और शिवार्चन के बीच सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक साथ भगवान शिव के 12 स्वरूपों के दर्शन होते हैं। शिवार्चन और रुद्राभिषेक के साथ ही भगवान शिव को चढऩे वाला जल सीधे जमीन में जाकर भूजल स्तर बढ़ाता है।

Rafiya NazSun, 25 Jul 2021 12:08 PM (IST)
सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक साथ भगवान शिव के 12 स्वरूपों के दर्शन होते हैं।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। भगवान शिव की आराधना के श्रावण मास में पुण्य की कामना को लेकर श्रद्धालु शिव मंदिरों की ओर से रुख करते हैं। रुद्राभिषेक और शिवार्चन के बीच सदर के द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर में एक साथ भगवान शिव के 12 स्वरूपों के दर्शन होते हैं। शिवार्चन और रुद्राभिषेक के साथ ही भगवान शिव को चढऩे वाला जल सीधे जमीन में जाकर भूजल स्तर बढ़ाता है। संक्रमण के चलते बिना मास्क के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा।

इतिहास: मंदिर की स्थापना की सही तिथि के बारे में तो जानकारी नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि कानपुर के लाला छेदीलाल अग्रवाल ने पौने दो सौ साल पहले शिवलिंग की स्थापना की थी। सिद्धपीठ के रूप में स्थापित मंदिर में सभी शुभ कार्य करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते थे। श्रद्धालुओं ने ही मिलकर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। अयोध्या के संत नृत्यगोपाल दास ने यहां द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर का उद्घाटन किया था। मंदिर में भगवान शिव के सभी 12 स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचते हैं। हर स्वरूप उनके मूल स्वरूप के समान है।

विशेषता: मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन का पुण्य एक स्थान पर मिलता है। राजधानी में अपनी तरह का ऐसा पहला मंदिर है, जहां जल चढ़ाने के लिए आपको गंगाजलयुक्त शुद्ध जल शिवलिंग के पास ही मिल जाता है। शिवलिंग पर चढ़ा जल नालियों के बजाय सीधे रीचार्जिंग के लिए जमीन में चला जाता है। वहीं, दूध की खीर व मिल्कशेक बनाकर श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

पदाधिकारी: अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि मंदिर में परिवार के साथ रुद्राभिषेक करने की पूरी व्यवस्था रहती है। पुजारी गुड्डू पंडित के सानिध्य में विद्वानों की टोली अभिषेक कराती है। श्रावण के चारों सोमवार व नागपंचमी पर 15 परिवार को एक बार में रुद्राभिषेक की सुविधा मिलेगी।

मंत्री आलोक सिंघल ने बताया कि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसका पूरा इंतजाम किया गया है। महिलाओं की ओर से हर सोमवार को भजन संध्या का आयोजन किया जाता है। संक्रमण के चलते मंदिर में घंटा बजाने पर प्रतिबंध रहेगा।

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