डेढ़ साल से दे रहे आश्वासन की घुट्टी, नहीं खुल पाया दूसरा कोविड अस्पताल

डेढ़ साल से दे रहे आश्वासन की घुट्टी, नहीं खुल पाया दूसरा कोविड अस्पताल

जिले के मोतीपुर गांव में स्थित मदर चाइल्ड अस्पताल की व्यवस्था पूरी होने का नाम नहीं ले

JagranThu, 06 May 2021 11:45 PM (IST)

लखीमपुर: जिले के मोतीपुर गांव में स्थित मदर चाइल्ड अस्पताल की व्यवस्था पूरी होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि इस अस्पताल को प्रशासन पिछले डेढ़ साल से कोविड अस्पताल बनाने की कवायद में जुटा है। बार-बार डीएम से लेकर अन्य अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं और दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति यह है कि सिर्फ एक जगसड़ को छोड़कर जिलेभर में प्रशासन दूसरा कोविड अस्पताल नहीं बना पाया। इन लापरवाहियों की वजह से हालत यह है कि अब जगसड़ में भी मरीजों की बाढ़ आ गई है, वहां जिम्मेदार मरीज भर्ती नहीं कर रहे हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि इलाज के लिए मरीज फर्श पर लेटे हुए हैं। जिन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा है। दवाओं और ऑक्सीजन का अभाव इस कदर है कि जिला अस्पताल में औसतन 22 से 25 मौतें रोज हो रही हैं। प्रशासन ने लाज बचाने के लिए निजी शिखर हॉस्पिटल को अधिकृत किया, लेकिन उसने हाथ खड़े कर दिए। दूसरा कोविड-19 सेंटर न होने के कारण अब मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

अभी एक दिन पहले ही डीएम शैलेंद्र सिंह 200 बेड वाले मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल मोतीपुर का दौरा करके आए हैं। भरोसा दिलाया है कि जल्द ही इसे कोविड अस्पताल के रूप में शुरू किया जाएगा। इससे पूर्व में भी तत्कालीन डीएम आकाशदीप, मौजूदा डीएम शैलेंद्र सिंह सहित कई अधिकारी वहां जा चुके हैं। सभी से यह आश्वासन मिलता रहा है कि जल्द ही इस अस्पताल को शुरू किया जाएगा, लेकिन हर बार जनता बेचारी ही रही है। एक बार फिर भरोसा मिला है कि अस्पताल जल्द शुरू किया जाएगा। अब देखना यह है कि इस महामारी के दौर में अधिकारी खीरी की बेचारी जनता के लिए डेढ़ साल बाद भी दूसरा कोविड हॉस्पिटल दे पाते हैं या नहीं। हैरत की बात ये है कि कोरोना के पहले फेज में तमाम अस्पतालों और होटलों तक का अधिग्रहण कर लिया था, लेकिन जब इलाज के अभाव में मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है, तब प्रशासन चुप्पी साधे हुए है।

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2017 में कंप्लीट था अस्पताल का भवन

मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल का निर्माण सपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014 में शुरू हुआ था। बताया जाता है कि जब वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनी तब हॉस्पिटल का भवन बनकर तैयार था। केवल स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करानी थीं। एक अधिकारी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को भाजपा सरकार ने भी सपोर्ट किया और कार्यदायी संस्था को बजट रिलीज किया, फिर भी कार्यदायी संस्था मनमाने ढंग से काम करती रही। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के बारे में नहीं सोचा। आज हालत यह है कि संकट काल में भी इस हॉस्पिटल की सेवाएं लोगों को नहीं मिल पा रही है।

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