धौरहरा के 116 गांवों पर बाढ़ का कहर, हर ओर पानी ही पानी

नेशनल हाईवे पर चढ़ गई शारदा यातायात थमागांवों के संपर्क मार्ग डूबे

JagranPublish:Fri, 22 Oct 2021 11:44 PM (IST) Updated:Fri, 22 Oct 2021 11:44 PM (IST)
धौरहरा के 116 गांवों पर बाढ़ का कहर, हर ओर पानी ही पानी
धौरहरा के 116 गांवों पर बाढ़ का कहर, हर ओर पानी ही पानी

धौरहरा (लखीमपुर) : शुक्रवार तक शारदा नदी ने 24 गांव और डुबा दिए। गुरुवार तक शारदा और घाघरा नदी से प्रभावित गांवों की संख्या अब 116 हो गई है। नेशनल हाईवे 730 शारदा के वेग से कई फीट कट चुका है। यहां भारी वाहनों का यातायात बंद कर दिया गया है। हजारों लोग रोड के किनारे पड़े हैं। तहसील क्षेत्र के तकरीबन सभी लिक मार्ग बाढ़ का पानी भरने से बंद हो गए हैं। अधिक जलभराव वाले अधिकांश गांवों में बिजली भी ठप है। गांवों में एक दूसरे से संपर्क टूट गया है। गांवों के बीच आपसी आवागमन का एकमात्र साधन नाव है लेकिन, यह भी हर जगह उपलब्ध नहीं है। दरअसल प्रशासन ने इस पहलू को नजर अंदाज करते हुए नावों की व्यवस्था ही नहीं की है। जिनके पास अपनी नावें हैं वह इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।

नाव मिली न इलाज, मौत की नींद सो गया लक्ष्मण

रैनी गांव के निवासी लक्ष्मण निषाद (40) पुत्र रोधी की इसलिए मौत हो गई कि वह घर व गांव में पानी भरा होने के कारण दवा लेने नहीं जा सका। दिव्यांग लक्ष्मण कई दिन से बीमार था। बाढ़ की वजह से उसे इलाज में दिक्कत हुई तो कई जगह उसके घरवालों ने नाव के लिए गुहार लगाई लेकिन, नाव मिली, न चिकित्सा और उसकी मौत हो गई। बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन एनडीआरएफ के स्टीमर का उपयोग कर रहा है। फिलहाल तहसील के पास ऐसे पांच स्टीमर हैं। यह अलग-अलग जगह लगाए गए हैं। इसके अलावा धौरहरा वन रेंज के एक स्टीमर का इस्तेमाल किया जा रहा है। रैनी, रेहरिया, मूसेपुर, लुधौनी, महादेव, समदहा आदि सैकड़ों गांव के ग्रामीण कहते हैं कि अगर प्रशासन गांवों में नाव की व्यवस्था कराता तो जिदगी आसान हो सकती थी।

28 हजार लंच पैकेट बांटने का दावा

प्रशासन का दावा है कि उसने शुक्रवार तक 266 लोगों को रेस्क्यू किया है। अलग-अलग जगहों पर लेखपालों को लगाकर 27950 लंच पैकेट बनवा कर वितरित किए गए हैं। इस दावे के विपरीत ग्रामीण बताते हैं कि लंच पैकेट बनवाने का काम कोटेदारों और प्रधानों के कंधों पर डाला गया है। यह लंच पैकेट अगर दिन में मिले तो रात का और रात में मिले तो दिन का कोई भरोसा नहीं। छोटे बच्चों के लिए दूध, बीमारों के लिए दवाई की भी व्यवस्था नहीं है। यह हाल तब है जब डीएम अरविद चौरसिया खुद क्षेत्र में बने हुए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक राजस्व कर्मी बताता है कि अधिकारियों ने 35 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से लंच पैकेट का भुगतान करने की बात कही है लेकिन, हाथ में एक ढेला नहीं दिया गया। ऐसे में प्रधानों और कोटेदारों की मदद से ही काम चलाया जा रहा है।

बर्बाद हो गई दस हजार हेक्टेयर खड़ी फसल

बेमौसम हुई बरसात और उसके बाद आई भयंकर बाढ़ से किसान पूरी तरह चौपट हो गया है। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से ही तहसील क्षेत्र में 9996 हेक्टेयर खड़ी फसल तबाह हो गई है। इसमें अधिकांश धान की फसल है जो पककर तैयार थी। बहुत से किसानों ने शुक्रवार और शनिवार को ही फसल काटी थी। उसकी मड़ाई कर आनाज घर आता उससे पहले शनिवार को प्रकृति ने कहर बरपा दिया। गन्ने की फसल पहले तूफान में गिरी फिर बाढ़ का पानी भरने से बर्बाद हो गई। केले के खेत टूट कर गिर गए और जो केला 12 सौ और 13 सौ रुपये क्विटल बिक रहा था वह एकदम से दो सौ और तीन सौ रुपये में आ गया।

बाढ़ के दबाव में जंगपुर के पास कटने लगा बांध

फूलबेहड़ (लखीमपुर) : क्षेत्र में बाढ़ के दबाव में जंगपुर के पास बांध कटने लगा। ग्रामीण सुबह-सुबह जब बांध पर निकल रहे थे तो उन्हे बांध में कटान दिखा। उसकी जानकारी गांव में दी। मौके पर तमाम लोग पहुंच गए और कटान रोकने के लिए पेड़ो की डालें और मिट्टी की बोरियां डालनी शुरू की और ग्रामीणों ने सिचाई विभाग को भी सूचना दी लेकिन, सूचना के बावजूद भी कोई भी विभाग का कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। ग्रामीण अपने स्तर से प्रयास में लगे रहे। शाम को विभाग ने मिट्टी की भरी बोरियां भेजी पूरी रात सिचाई विभाग व ग्रामीणों ने कटान रोकने का प्रयास जारी रखा। शुक्रवार सुबह मुख्य अभियंता शारदा सहायक लखनऊ एके सिहं मौके पर पहुंचे और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। वहां मौजूद जिला पंचायत सदस्य रजीउल्ला ने कहा गत वर्ष तटबंध को मजबूत करने के लिए अंदर से पत्थर लगवाए गए थे लेकिन, जंगपुर के पश्चिम करीब आठ सौ मीटर कार्य नहीं हो पाया था। अगर यहां पत्थर लग जाए तो आगे दिक्कत नही होगी।इस मौके पर एक्स सीएन जेपी सिहं,जेई सतीश कुमार, जेई वैभव पाठक, ऐई अब्किश मिश्रा मौजूद थे।

बाढ़ के चलते कई मार्ग पर आवागमन बाधित

निघासन: शारदा नदी के उफान से आई बाढ़ से कई गांव प्रभावित हुए तो वहीं कई गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह टूट गया है। गांवों की सड़कों एवं पुलियों पर बाढ़ का पानी आ जाने से ग्रामीण इलाके के कई सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए शुक्रवार को विकास खंड निघासन के गांवों में प्रशासन ने लेखपालों को तैनात कर दिया है। विकास खंड निघासन के बाढ़ प्रभावित गांव में ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव लगा दी गई है।

बाढ़ में फंसे 400 ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर कराया शिफ्ट

लखीमपुर: धौरहरा तहसील के समदहा गांव में जलसैलाब आने की जानकारी होते ही शुक्रवार की रात साढ़े तीन बजे अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। डीएम डॉ. अरविद कुमार चौरसिया व एसपी विजय ढुल ने गांव पहुंच कर अपने सामने ही ट्रैक्टर के जरिए करीब 400 लोगों को रेस्क्यू करके निकलवाया। इनमें तमाम महिलाएं व बच्चे भी थे। डीएम-एसपी तब तक गांव में खड़े रहे, जब तक प्रभावितों को ऊंचे स्थानों पर शिफ्ट नहीं कर दिया गया। वहीं बाढ़ खंड के अधिकारियों को गांव में नदी का पानी ना पहुंचे, इसके लिए युद्ध स्तर पर काम करने का निर्देश दिया। इससे पहले प्रशासन ने ड्रोन के जरिए बाढ़ से प्रभावित इलाकों की निगरानी कराया। गांव में अधिकारियों का पूरा जोर हर जरूरतमंद व प्रभावित व्यक्ति तक मदद पहुंचाने पर रहा। सभी प्रभावितों तक लंच पैकेट, शुद्ध पेयजल भिजवाया जा रहा है। जिले में कैंप कर रहे कमिश्नर रंजन कुमार ने भी समदहा पहुंचकर बाढ़पीड़ितों की समस्याओं व प्रशासन की कवायदों को देखा। इस दौरान एडीएम संजय कुमार सिंह, एएसपी अरुण कुमार सिंह, एसडीएम रेनू सहित तमाम अधिकारी-कर्मचारी वहां मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी कराते रहे।

दो युवक लापता

लखीमपुर: अपने तीन साथियों के साथ क्षेत्र के गांव शिवलालपुरवा निवासी पवन मौर्य (19) पुत्र संतराम मौर्य गांव के ही प्राथमिक विद्यालय के पास बाढ़ देखने गया था। अचानक तालाब के किनारे पैर फिसलने वो तालाब में गिर गया। पानी का बहाव इतनी तेज था कि उसके बाद वो दिखाई नहीं पड़ा। परिवारीजन ने बताया कि शुक्रवार की दोपहर दो साथियों के साथ पवन बाढ़ देखने के लिए गया था। प्राथमिक विद्यालय के पास अपने साथियों के साथ वो खेलने लगा कि अचानक से उसका पैर फिसल गया और वो तालाब में गिर गया उसके बाद से वह नजर नहीं आया। फिलहाल मौके पर पहुंचे प्रसाशन ने रेस्क्यू जारी किया। देर शाम तक पवन का कोई भी पता नहीं चला।

वहीं दूसरी और बोझिया निवासी छैलू पुत्र भोंदू जो अपने खेत में धान काटने गया था। जहां बाढ़ के पानी में बह जाने से उनका कुछ पता नहीं चल रहा है। जिससे परिवारजन का रो-रो कर बुरा हाल है। प्रशासन दोनों व्यक्तियों की तलाश में जुड़ा है लेकिन देर शाम तक दोनों का कुछ पता नही चला।