जटपुरा व महुरैना बीट में पांचवे दिन भी हाथियों का उत्पात जारी

लखीमपुर मैलानी वन क्षेत्र की जटपुरा व महुरैना बीट में पांचवें दिन भी हाथियों का उत्पात जार

JagranSat, 24 Jul 2021 11:00 PM (IST)
जटपुरा व महुरैना बीट में पांचवे दिन भी हाथियों का उत्पात जारी

लखीमपुर : मैलानी वन क्षेत्र की जटपुरा व महुरैना बीट में पांचवें दिन भी हाथियों का उत्पात जारी है। हाथियों ने करीब एक दर्जन किसानों की फसलों को रौंद कर बर्बाद कर दिया। वन क्षेत्राधिकारी ने वन विभाग के कर्मचारियों व किसानों के सहयोग से हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। जटपुरा बीट में शाम लगभग 6 बजे हाथियों के झुंड ने उत्पाद मचाना शुरू किया। हाथियों के झुंड ने किसान भाग सिंह के खेतों में पास रखवाली कर रहे किसानों ने हल्ला मचाते हुए, पटाखे दागने, पताली जलाकर खेतों से भगाया। वहां से हटकर हाथियों का झुंड बलजीत सिंह के खेतों में घुसा। जहां उसकी धान की फसल नष्ट कर दी। महुरैना के लेखराम, दिनेश कुमार, वीरेंद्र पाल के धान घुरई व सतपाल सिंह की गन्ने की फसल नगरिया मे रायबहादुर, श्याम बिहारी का धान, गोपाल व राजेंद्र का दो बीघा गन्ना की फसलों को नुकसान पहुंचा। हाथियों द्वारा लगातार किए जा रहे नुकसान से परेशान हैं। मैलानी में 15 हाथियों के दो झुंड मचा रहे तांडव वैसे तो जंगलों की प्राकृतिक सुंदरता वन्यजीवों के लिए एक वरदान है, लेकिन कभी-कभी यही सुंदरता इंसानों के लिए खतरनाक साबित होती है। पीलीभीत के रास्ते नेपाल से आए हाथियों के दो झुंडों के तांडव से इनदिनों जंगल से सटे कई गांवों की करीब 10 हजार की आबादी और उनकी फसलें खतरे में हैं। कुल 15-16 हाथी पूरे इलाके में लोगों का जीना हराम किए हुए हैं। अब डर ये है कि जब तक शारदा नदी में बाढ़ का पानी कम नहीं होगा, तब तक ये हाथी वापस नहीं लौटने वाले हैं।

वर्ष 2019 में भी 25 हाथी इसी रूट से मैलानी, मोहम्मदी आदि जगहों पर आए थे। तब भी हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया था। इस बार सिर्फ 15 हाथी नेपाल से आए हैं जो आठ व सात की झुंड में खुलेआम घूम रहे हैं। मैलानी क्षेत्र में यह हाथी मुहरेना, जटपुरा, सुआबोझ, नारंग, रायपुर, हरदुआ सहित गांव में किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं और झोपड़ियां उलट रहे हैं। वन विभाग लगातार गांव वालों को जागरूक करने के प्रयास में जुटा हुआ है। बताया जा रहा है कि वे रात में इकठ्ठा रहकर जागते और अलाव जलाते रहें। वन विभाग व ग्रामीण हाथियों को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं, लेकिन हाथियों को तांडव से रोक नहीं पा रहे। अधिकारियों का कहना है कि दरअसल मुहरेना व जटपुरा बीट की प्राकृतिक सुंदरता हाथियों के मुफीद है। समृद्ध जंगल हाथियों को लुभा रहे हैं। भोजन-पानी के साथ ही हाथियों को यहां बेहजर आश्रय स्थल मिल रहा है। इसी कारण नेपाल से आए हाथियों ने दो साल पहले भी इसी इलाके को अपने ठहराव के लिए चुना था। इस बार भी लंबी अवधि तक हाथियों के यहां टिकने के लक्षण दिख रहे हैं। पूर्व पीसीसीएफ ने भी की थी तारीफ

मध्यप्रदेश के पूर्व पीसीसीएफ एसएस श्रीवास्तव तीन साल पहले दुधवा और मैलानी का जंगल देखने पहुंचे थे। अधिकारियों से ये कहा था कि मुहरेना, जटपुरा बीट को हाथियों के लिए काफी समृद्ध है। इसके एक साल बाद ही दो दर्जन हाथी यहां आकर इन दोनों बीटों में ही टिक गए थे। बफरजोन के डीडी डॉ. अनिल पटेल का कहना है कि वन्यजीवों खासकर हाथियों के लिए मुहरेना व जटपुरा के जंगल बेहद मुफीद हैं। हाथियों का यहां ठहरना ही यह बता रहा कि इलाका हरे-भरे जंगलों से समृद्ध है। कर्मचारियों को हाथियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार उनके मूवमेंट की निगरानी हो रही है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.