कुशीनगर में हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय

कुशीनगर में सावन के अंतिम सोमवार को मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रही पुलिस।

JagranTue, 17 Aug 2021 01:17 AM (IST)
कुशीनगर में हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय

कुशीनगर : सावन मास के अंतिम सोमवार को क्षेत्र के शिवालय हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठे। लोग भक्ति भाव के रंग से सराबोर दिखे। पडरौना नगर के प्रसिद्ध सिधुवां बाबा स्थान व कुबेरधाम में सुबह भक्तों के आने का क्रम शुरू हुआ तो फिर रुका नहीं। पूजन-अर्चन का क्रम प्रात:काल से रात तक श्रद्धा भाव से चलता रहा।

इस दौरान लोगों का सेवा भाव भी देखने को मिला। अनेक स्थानों पर भक्तों के लिए पीने के पानी सहित नाश्ता आदि का भी इंतजाम रहा। आचार्य प्रद्युम्न पांडेय, महंत राजकुमार गिरी, विनोद गिरी, उमेश मिश्र, जनार्दन मिश्र, राजेंद्र पांडेय, राजेंद्र गिरी आदि व्यवस्था में लगे रहे। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एसओ संजय कुमार, दारोगा कन्हैया यादव, अजीत यादव सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। करहियां शिवमंदिर में भी सुबह से रात तक श्रद्घालुओं की भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे जयकारे से वातावरण भक्तिमय बना रहा। गायत्री मंदिर सहित सभी मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रही।

हाटा क्षेत्र के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान शिव को भांग, धतूरा, गन्ना आदि अर्पित कर मंगल कामना की। उपनगर के करमहा रोड स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर, महादेव छपरा स्थित शिवमंदिर, सुदामाचक स्थित शिवालय, ढाढा स्थित शिवमंदिर, सुकरौली स्थित शिवालय, सेंदुआर स्थित शिवालय आदि मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। हर हर महादेव के नारों से शिवालय गूंजते रहे।

सती की परीक्षा लेने पर नाराज हुए भगवान शिव

सदर विकास खंड के बढ़वलिया बुजुर्ग गांव में मां काली मंदिर परिसर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथावाचक पंडित सौरभ मणि त्रिपाठी ने सती की ओर से ली गई प्रभु श्रीराम की परीक्षा से जुड़े प्रसंग का वर्णन किया।

कहा कि सीता हरण के बाद श्रीराम व लक्ष्मण वन में भटक रहे थे। उसी दौरान भगवान शिव और सती वन से होकर कैलाश पर्वत पर जा रहे थे। शिव ने श्रीराम को देखकर प्रणाम किया तो सती भ्रमित हो गईं। उन्होंने शिव से कहा कि मैं इनकी परीक्षा लेने जा रही हूं। सीता के वेश में वह श्रीराम के आगे-आगे चलने लगीं तो श्रीराम ने उन्हें पहचान लिया। इससे नाराज होकर शिव ने सती का त्याग कर दिया। प्रधान अनिल तिवारी, दीपक कुमार, उपेंद्र तिवारी, राजन कुमार, विनोद त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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