सरस्वती महायज्ञ से भक्तिमय हुआ माहौल

सरस्वती महायज्ञ से भक्तिमय हुआ माहौल

कुशीनगर के तुर्कपट्टी क्षेत्र के महुंवा बुजुर्ग गांव में नौ दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया गया है इसके लिए कलशयात्रा निकाली गई।

JagranWed, 14 Apr 2021 01:26 AM (IST)

कुशीनगर: क्षेत्र के गांव महुंअवा बुजुर्ग में देवताल स्थित स्थनई माई मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय सरस्वती महायज्ञ का शुभारंभ मंगलवार को कलश यात्रा के साथ हुआ।

कलश लिए जयकारा लगाते श्रद्धालु तुर्कपट्टी, नोनिया पट्टी, कोरया व सरिसवां होते हुए देवीपुर स्थित झरही माई मंदिर के समीप झरही नदी पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरा गया। यज्ञ 13 से 20 अप्रैल तक होगा। कथा वाचक सत्य मणि त्रिपाठी द्वारा कथा का रसपान कराया जाएगा। यज्ञ की पूर्णाहुति भंडारे के साथ होगी। आयोजक संजय मिश्रा कामेश्वर शाही, अमरेश यादव, शैलेंद्र कुमार तिवारी, पप्पू शाही, सत्यानंद शाही, हरेश पटेल, संतोष गोंड, सुनील श्रीवास्तव,शत्रुघ्न रावत, राजेश चौहान, मुकेश पासवान आदि उपस्थित रहे।

शतचंडी महायज्ञ का हुआ शुभारंभ

सोहसा मठिया क्षेत्र के गांव कुरमौटा मंझरिया स्थित सतुगड़ही देवी स्थान पर चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन मंगलवार को शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। काफी संख्या में महिला व युवतियां शामिल हुईं। कलश यात्रा मंझरिया, महुंई, नरकटिया, कछुहियां, कुरमौटा, छेरिहवां, रामनगर होते हुए पुन: आयोजन स्थल पर पहुंच कर समाप्त हुई। आचार्य अनिरूद्ध पांडेय व चंद्रशेखर पांडेय ने मंत्रोचर के बीच कलश स्थापित कराया। बुधवार से कथावाचक प्रियंका द्विवेदी मानस कथा का रसपान कराएंगी। रात्रि में मिथिला की रामलीला मंडली का मंचन होगा। 21 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ यज्ञ संपन्न होगा। आयोजक मंडल के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, प्रदीप सिंह, अशोक शर्मा, बलराम सिंह, बालमुकुंद, मुकेश सिंह, शिवाकांत ओझा, अखिलेश ओझा, अशोक वर्मा आदि उपस्थित रहे।

राधा-कृष्ण की मूर्ति में हुई प्राण प्रतिष्ठा

सुकरौली बाजार के बढ़या खुर्द पिपरपाती मोहल्ला स्थित शिव मंदिर परिसर में सोमवार को राधा-कृष्ण की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की गई। आचार्य पंडित दीनदयाल मिश्र की ओर से विधिवत पूजन कराया गया।

इस मौके पर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का बखान करते हुए आचार्य ने कहा कि वह सभी देवताओं के देवता हैं। कमलनयन श्रीकृष्ण में ही संपूर्ण सृष्टि समाहित है। वही आत्मस्वरूप महात्मा और पुरुषोत्तम भी हैं। तीनों लोक के ईश्वर श्रीहरि पृथ्वी की सृष्टि कर जल में शयन करते हैं। उन्होंने अपने मुख से अग्नि की, प्राण से वायु की व मन से सरस्वती देवी और वेदों की रचना की। यजमान चंद्रिका प्रसाद गुप्त, राजेश गुप्ता, बिकाऊ प्रसाद, मोहनलाल गुप्ता, शिवपूजन गुप्त, रामसेवक गुप्ता, रामलाल दास, रामाश्रय, विक्रम मद्धेशिया, महेश, संजय, रामगोविद, रामानंद आदि मौजूद रहे।

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