जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट लगाने को बढ़े कदम

जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट लगाने को बढ़े कदम

कोरोना वायरस को लेकर जंग लड़ने की मिसाल देखनी हो तो ग्रामपंचायत विशुनपुरा के एक परिवार की जिदादिली देख लीजिए। एक ही परिवार के आठ सदस्य कोरोना संक्रमित हैं। बीमारी को हौसले से हराने में जुटे हैं।

JagranSat, 08 May 2021 12:02 AM (IST)

कुशीनगर: वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने व आक्सीजन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए पडरौना नगरपालिका की ओर से सराहनीय पहल की गई है। 24 अप्रैल को जिलाधिकारी से संवाद के क्रम में नगरपालिका अध्यक्ष विनय जायसवाल की ओर से कदम बढ़ाया गया है।

जिले में उपजे आक्सीजन संकट के समाधान के लिए जिला अस्पताल में प्लांट स्थापित कराने के लिए नगरपालिका की ओर से राज्य वित्त आयोग से मिले धन में से एक करोड़ 38 लाख देने का निर्णय लिया गया है। उस दिशा में शुक्रवार को पहली किस्त के रूप में 30 लाख अवमुक्त कर प्लांट लगाने वाली डिवाइन इन एक्सपोर्ट कंपनी के खाते में भेज दी गई है। लोगों का कहना है कि नपा ने संकट की घड़ी में बेहतर मिसाल पेश की है। अगर जिले के सभी नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों की ओर से इसमें सहयोग किया जाए तो यहां आक्सीजन की कभी किल्लत ही नहीं होगी। कुशीनगर जिले में आक्सीजन के अभाव में कोई मौत नहीं होगी। आक्सीजन के लिए मरीजों के स्वजन को भटकना नहीं पड़ेगा।

-विनय जायसवाल, नपाध्यक्ष ने बताया कि महामारी के बीच आमजन की मदद करना हम सभी का दायित्व है। जनपद का कोई भी व्यक्ति आक्सीजन की कमी से जूझने न पाए, इसलिए डीएम की ओर से जिला मुख्यालय पर प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इसके लिए मुझसे संवाद किया तो नगरपालिका की ओर से सहयोग का निर्णय लिया गया। कोरोना से डंटकर जंग लड़ रहा पूरा परिवार

कोरोना वायरस को लेकर जंग लड़ने की मिसाल देखनी हो तो ग्रामपंचायत विशुनपुरा के एक परिवार की जिदादिली देख लीजिए। एक ही परिवार के आठ सदस्य कोरोना संक्रमित हैं। बीमारी को हौसले से हराने में जुटे हैं। एक-दूसरे का ख्याल रखते हुए इस बीमारी से जंग जीतने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं और कह रहे हैं कि बीमारी को हारना ही होगा।

इंजीनियर बेटी प्रतिज्ञा बताती हैं कि जब पता चला कि लैब टेक्नीशियन मेरे पापा रामअशीष राय, माता बीनू , बहन प्राची, भाई संकेत, मंकेत, चाचा सुधाकर, चाची शीला, देवानंद, सरिता पाजिटिव हो गए हैं तो देखभाल करने के लिए बंगलौर से घर आ गईं। 18 सदस्यों वाले इस परिवार में 52 वर्ष से लेकर 12 साल के छोटे बच्चे तक कोरोना की चपेट में हैं। प्रतिज्ञा बताती हैं कि पापा दिन-रात यहां तक कि रविवार को भी कोरोना जांच करते रहे। पूरा परिवार संक्रमित हो गया, फिर भी छुट्टी नहीं मिली। मिली भी तब, जब उनकी रिपोर्ट पाजिटिव आ गई। मेरे परिवार ने हिम्मत नहीं हारी है और कोरोना पीड़ित होते हुए भी लगातार एक-दूसरे की देखभाल कर रहे हैं। मैंने खुद सभी को मानसिक तौर पर संभाले रखा है व कोरोना से लड़ने की हिम्मत दी है। शीघ्र बीमारी को मात देकर मेरा पूरा परिवार बाहर निकलेगा। दवा के साथ बचाव के रोग से लड़ने के सारे इंतजाम किए जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात कि सभी ने संकल्प लिया है कि बीमारी को हराकर ही दम लेंगे।

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