अमर्यादित भाषा ही राजभर की वास्तविक पहचान: मनोज

कुशीनगर आए दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि व्यक्ति की पहचान का माध्यम उसकी भाषा है ओमप्रकाश राजभर ने अपनी बातों से सिर्फ अपनी पहचान बताई है।

JagranPublish:Thu, 02 Dec 2021 12:19 AM (IST) Updated:Thu, 02 Dec 2021 12:19 AM (IST)
अमर्यादित भाषा ही राजभर की वास्तविक पहचान: मनोज
अमर्यादित भाषा ही राजभर की वास्तविक पहचान: मनोज

कुशीनगर : व्यक्ति की पहचान उसकी भाषा से ही होती है। सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा के लिए अमर्यादित वक्तव्य देकर अपनी पहचान बताई है। यह बातें दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद मनोज तिवारी ने कही। वह बुधवार की दोपहर तुर्कपट्टी स्थित सूर्यमंदिर में पूजा अर्चना के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे।

सांसद ने कहा कि गुंडों जैसी भाषा का प्रयोग करके ओमप्रकाश राजभर ने पूरे प्रदेश में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। प्रदेश की जनता के बीच उनका कोई वजूद नहीं है। अब वह हताशा में आकर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। 2022 में पुन: भाजपा प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने जा रही है। प्रदेश में अब गुंडा हैं न ही गुंडाराज है। जनता की सरकार चल रही है। कुशीनगर की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा प्रदेश सरकार ने दे दिया है। बुद्ध नगरी विश्व के मानचित्र पर प्रदर्शित होगी। इसके पूर्व भाजपा नेता ने विधि विधान से सूर्य उपासना की।

त्याग व भक्ति से व्यक्ति बनता है श्रेष्ठ : अतुल कृष्ण

जगदीश पब्लिक स्कूल गौरीश्रीराम परिसर में आयोजित रामकथा के सातवें दिन आचार्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भरत और केवट का उदाहरण देते हुए बताया कि त्याग और भक्ति के जरिये छोटे से छोटा व्यक्ति भी श्रेष्ठ हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भरत ने अपने भाई श्रीराम से संपत्ति का बंटवारा नहीं किया, लेकिन विपत्ति का बंटवारा किया। यह अपने आप में अद्भुत है। इसीलिए मानस सदैव व्यक्तित्व के विकास की प्रेरणा देता है। इसी प्रकार नदी पार कराने के लिए केवट ने जिद करके प्रभु श्रीराम के पैर धुलवाने को विवश किया। प्रभु के पैर धोकर केवट ने स्वयं अपना ही नहीं अपने कुल और पीढि़यों का भी उद्धार किया। राम ने भरत को रघुवंश का हंस कहकर संबोधित किया था। भरत जी प्रेम रूपी अमृत के सागर हैं और इनका हृदय भी सागर सा विशाल हैं। सांसद मनोज तिवारी ने व्यास पीठ की आरती की। डा. बाल मुकुन्द पाण्डेय आदि मौजूद रहे।