कुशीनगर के सरकारी विभागों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम नहीं

कुशीनगर के सरकारी विभाग वर्षा जल संरक्षण के लिए नहीं कर रहे पहल नए भवनों के निर्माण में इस तरफ नहीं दिया जा रहा ध्यान भविष्य में होगा जलसंकट।

JagranWed, 23 Jun 2021 12:35 AM (IST)
कुशीनगर के सरकारी विभागों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम नहीं

कुशीनगर: जिले के सभी सरकारी दफ्तरों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था नहीं है। चाहे वह कलेक्ट्रेट हो अथवा विकास भवन कहीं भी इसका इंतजाम नहीं है। पुलिस कार्यालय, एआरटीओ विभाग, उद्यान, पुलिस लाइन, वाणिज्य कर कार्यालय, सीएमओ दफ्तर में सिस्टम नहीं है। ऐसे में रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

सभी जानते हैं कि जल के बिना जीवन अधूरा है, लेकिन इसे संचित करने की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया। हम सब की यह लापरवाही आने वाले दिनों में पानी के संकट के रूप में सामने होगी। आइए संकल्प लें कि अब से नए सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम की व्यवस्था जरूर करेंगे।

नगरीय क्षेत्र में भी अनभिज्ञ हैं जिम्मेदार

नगरीय क्षेत्र में जिम्मेदार अधिकारी अभी तक इससे अनभिज्ञ हैं। नगर पालिका परिषद पडरौना, कुशीनगर, हाटा, नगर पंचायत सेवरही, तमकुहीराज, फाजिलनगर, दुदही, सुकरौली, कप्तानगंज, रामकोला, खड्डा, छितौनी के अलावा जिले के महिला समेत 18 थानों पर इसकी व्यवस्था के प्रति किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई।

अब भी चेतें तो बने बात

बारिश के जल को संचित करने की जरूरत है, अब भी हम सब नहीं चेते तो आने दिनों में स्थिति और भयावह होगी। जनपद में जल स्तर लगातार गिर रहा है। दशकों पूर्व 20 से 30 फुट के बीच पाइप लगाने के बाद पीने योग्य पानी मिल जाता था। अब तो 70 से 90 फुट गहराई के बाद भी पीने योग्य पानी नहीं मिल पा रहा है। वर्षा जल संचयन अर्थात रेन वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम न लगने से बारिश का पानी बर्बाद हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो आगामी कुछ वर्षों में पीने योग्य पानी नहीं मिलेगा।

यह करें व्यवस्था

वर्षा जल संचित करने के लिए छत के बरसाती पानी को गड्ढे या खाई के जरिये सीधे जमीन के भीतर उतारने की व्यवस्था करें अथवा छत के पानी को किसी टैंक में एकत्र कर सीधे उपयोग में ले सकते है। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा तो जल स्तर में वृद्धि होगी।

एडीएम विंध्यवासिनी राय ने कहा कि

सरकारी भवन पहले के बने हुए हैं, उस समय इसको लेकर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब तकनीकी टीम को बुलवा कर इसे ठीक करवाने की व्यवस्था की जाएगी। आमजन को भी खुद के साथ दूसरों को भी प्रेरित करना होगा।

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