कुशीनगर में नहरों का संजाल, फिर भी पानी का अकाल

कुशीनगर में नहरों का संजाल, फिर भी पानी का अकाल

कुशीनगर में सिल्ट से पटी 1503 किमी नहरें महंगे डीजल से फसल की सिंचाई कर रहे किसान।

JagranMon, 07 Dec 2020 11:47 PM (IST)

कुशीनगर: किसानों को नहरों और सरकारी नलकूपों से सिचाई के लिए मिलने वाला पानी परेशानी का सबब बनता जा रहा है। यहां नहरों के संजाल के बावजूद पानी का अकाल बना हुआ है। स्थिति यह है कि रबी की फसलों की बोआई के बाद किसान पानी के लिए भटक रहे हैं। सरकारी नलकूप बंद होने के कारण किसानों के समक्ष यह संकट खड़ा हो गया है कि महंगे दाम पर डीजल खरीद सिचाई करें तो कैसे? क्योंकि हर जगह पंपिग सेट से सिचाई की सुविधा भी नहीं है।

जिले की सिल्ट से पटी 1503 किमी लंबी नहरें अब बेपानी हो गई हैं। इन नहरों व माइनरों में कभी भी हेड से लेकर टेल तक पानी नहीं पहुंचता। इसके कारण करीब 17 लाख से अधिक किसान सिचाई से वंचित रह जाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक क्षति भी उठानी पड़ रहा है।

जिले की आबादी करीब 40 लाख के आस-पास है। 14 ब्लाकों में बंटे इस जनपद में तीन दशक पूर्व करीब 245 नहरें व माइनर बनाई गई थी, उस समय पूरे जिले में राजकीय नलकूपों की संख्या 221 रही। धीरे-धीरे नहरों के टूटने व सिल्ट भरने के कारण अब 75 फीसद नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इस नाते टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। राजकीय नलकूप भी धीरे-धीरे बंद होते गए। मजबूरी में किसान पंपिग सेट के सहारे फसल की सिचाई कर रहे हैं जिससे काफी आर्थिक क्षति हो रही है। रबी फसल की बोआई की स्थिति

कुशीनगर में रबी की फसलों की बोआई 1.25 लाख हेक्टेयर में होती है। अब तक 1.05 लाख हेक्टेयर खेत बोया जा चुका है। .20 हेक्टेयर गन्ने की फसल होने की वजह से बोआई नहीं हो पाई है। इसमें राई, सरसो, तोरी, मसूर, मटर, जौ आदि शामिल हैं। इसकी पुष्टि जिला कृषि अधिकारी प्यारे लाल ने की है। यह हैं निजी संसाधन

सिचाई के लिए जनपद में कुल 40000 निजी पंपिग सेट हैं, तो 700 सोलर पंप लगे हैं। यह हैं सरकारी नलकूप

जनपद में सरकारी नलकूपों की संख्या 221 है, जिसमें आठ का मोटर खराब है। रोस्टर के अनुसार 20 दिसंबर तक आएगा पानी

सिचाई विभाग के अधिकारी बुधई प्रसाद का कहना है कि नहरों में पानी 20 दिसंबर तक आ जाएगा। इसके लिए रोस्टर बना लिया गया है।

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