कप्तानगंज चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ

कुशीनगर की कप्तानगंज चीनी मिल ने पेराई सत्र का शुभारंभ किया मंत्रोचार के बीच अतिथियों ने डोंगा में डाला गन्ना इस मौके पर विधायक ने एक सप्ताह में भुगतान शुरू करने का निर्देश मिल प्रबंधन को दिया।

JagranThu, 02 Dec 2021 11:21 PM (IST)
कप्तानगंज चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ

कुशीनगर: मंत्रोच्चार के बीच गुरुवार को विधायक रामानंद बौद्ध व एसडीएम कल्पना जायसवाल समेत मिल के अधिकारियों ने कप्जानगंज मिल के डोंगा में गन्ना डालकर चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ किया।

विधायक ने कहा कि शासन की मंशा अनुसार जिले की अधिकांश चीनी मिलों के पेराई का शुभारंभ हो गया है। कप्तानगंज चीनी मिल में भी गन्ने की पेराई शुरू हो गई है। पारदर्शिता के साथ गन्ने की तौल हो। किसानों का हित सर्वोपरि है, एक सप्ताह में चीनी मिल प्रबंधन गन्ना मूल्य भुगतान भी शुरू कर दे। नए के साथ 50 फीसद पुराना भुगतान हर हाल में 31 दिसंबर तक कर दिया जाए। कहा कि हर किसान को समय से पर्ची उपलब्ध कराई जाए, ताकि खेत खाली कर गेहूं की बोआई की जा सके। घटतौली किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीएम ने कहा कि शासन ने गन्ना मूल्य निर्धारित कर दिया है। चीनी मिल प्राथमिकता के आधार पर भुगतान की व्यवस्था करे। किसी किसान के साथ सौतेला व्यवहार हुआ तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हियुवा जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना ने भी संबोधित किया। चीनी मिल के अध्यक्ष आरके सक्सेना ने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है। प्राथमिकता के तहत सभी किसानों को पर्ची भेजी जा रही है। गन्ना मूल्य का भुगतान शीघ्र ही किसानों के खाते में भेजा जाएगा। उप महाप्रबंधक विनोद श्रीवास्तव व गन्ना महाप्रबंधक केए फारूकी ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। पूर्व विधायक पूर्णमासी देहाती, सहकारी गन्ना समिति के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह, भोला सिंह, एके सिंह, श्यामनारायण तिवारी आदि मौजूद रहे।

अर्ली के साथ गन्ने की सामान्य प्रजातियां भी बोएं किसान : डीसीओ

किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति बढा़ने के लिए अर्ली एवं सामान्य किस्म की प्रजातियों के शरद कालीन गन्ने की बोआई लाभकरी होगी। इसको लेकर पहल करने की जरूरत है। यह बातें गुरुवार को बभनौली स्थित गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं शोध संस्थान पर जिला गन्ना अधिकारी वेद प्रकाश सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहीं।

उन्होंने कहा कि सिर्फ एक ही प्रजाति पर किसानों को निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इसके लिए अर्ली किस्म कोशा 13235, कोलख 14201, को. 98014, 118 आदि हैं। जिन क्षेत्रों में अर्ली किस्म की को. 0118 व कोशा 8272 सूख रही है, इनको न बोएं। इनकी जगह पर सामान्य गन्ना प्रजाति कोशा 9232, 8279, कोसे 11453, 13452, 8452 आदि की बोआई करें। गन्ना गोष्ठियों के माध्यम से किसानों में जागरूकता पैदा हुई है। इसी का परिणाम है कि किसानों के साथ साथ विभिन्न महिला समूहों के माध्यम से सिगल बट सिस्टम से गन्ने की पौध तैयार की गई है। गन्ने की वैज्ञानिक खेती एवं सह फसली खेती को बढ़ावा मिला है। इसका प्रभाव अगले वर्ष गन्ना उत्पादन में बढ़ोत्तरी होने पर दिखाई देगा।

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